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Shaheed Udayman Singh: शहीद उदयमान सिंह की मां बोली -गर्व और गम के बीच चल रहा जिंदगी का पहिया

Mon, 25 Jul 2022 04:10 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

भारतीय सेना में हवलदार राजेंद्र सिंह 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान टाइगर हिल को पाकिस्तान से मुक्त करवाने के लिए वीरता से लड़ते हुए शहीद हो गए थे।
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टाइगर हिल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तेईस साल पहले देश पर बलिदान हुए सैन्य जवान उदयमान सिंह की माता कांता देवी ने बेटे के आखिरी समय की हर वस्तु संभल कर रखी है। इसमें उदयमान का गोली लगा पर्स भी शामिल है। पांच जुलाई 1999 को सेना की अठारह ग्रेनेडियर के जवान उदयमान सिंह ने पाकिस्तानी सेना के कब्जे से टाइगर हिल को मुक्त करवाने के लिए अदम्य साहस का परिचय देते हुए अमर बलिदान दिया था। मां कांता देवी को गुलशन ग्राउंड में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की तरफ से सामूहिक सम्मान समारोह में सम्मानित किया गया। 

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जम्मू जिले की श्यामा चक निवासी कांता देवी का कहना है कि उनकी तीन संतानों में से उदयमान सिंह उनका इकलौटा बेटा था। दो बेटिया हैं। बेटे की शादी की सोच ही रही थी कि कारगिल युद्ध शुरू हो गया और बेटे ने बहादुरी के साथ पाकिस्तानी सैनिकों का टाइगर हिल में मुकाबला कर सीने में कई गोलियां खाकर वीरगति प्राप्त की। उस समय उन्होंने अपने सीने के पास जेब में पर्स रखा था। उसमें भी कई गोलियां लगीं। वह उस पर्स को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को दिखाना चाहती थीं, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया। 

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कांता देवी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तरफ से बेटे की शहादत को नमन कर उन्हें सम्मानित किए जाने पर वह गर्व महसूस कर रही हैं, लेकिन मां होने के नाते उदयमान सिंह के चले जाने का उन्हें गम है जो आखिरी सांस तक रहेगा। उनकी जिंदगी का पहिया गर्व और गम के बीच चल रहा है।   

शहीद हवलदार राजेंद्र सिंह की वीरता को किया स्मरण
भारतीय सेना में हवलदार राजेंद्र सिंह 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान टाइगर हिल को पाकिस्तान से मुक्त करवाने के लिए वीरता से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। कठुआ जिले के राजेंद्र सिंह की पत्नी वीरनारी कंचन देवी कहती हैं कि टाइगर हिल से पाकिस्तानी सेना और आतंकियों को खदेड़ने के लिए उनके पति ने आखिरी सांस तक कुर्बान कर दी। आज वे हमारे बीच नहीं हैं लेकिन देश पूरी तरह से सुरक्षित है। उनका कहना है कि दोनों बेटे अब बड़े हो चुके हैं और रोजगार भी हासिल कर चुके हैं।
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