जम्मू कश्मीर में आजादी के बाद महंत रोहित शास्त्री को राज्य पुरस्कार मिला है। जम्मू कश्मीर पूरे विश्व में एकमात्र ऐसा राज्य है। जहां अतीत में सबसे लंबे समय तक न केवल पठन-पाठन अपितु संपर्क भाषा के रूप में भी देववाणी संस्कृत का प्रयोग होता रहा है। जम्मू कश्मीर की भूमि शैव दर्शन का सनातन केंद्र रही है |
ट्रस्ट ने कहा कि अगर हम जम्मू कश्मीर में देववाणी संस्कृत के लिए किये जा रहे सत्प्रयासों में युवाओं के योगदान की बात करें तो एक नाम सबसे सशक्त रूप में हमारे सामने आता है और वो नाम है जम्मू के युवा संस्कृतज्ञ, देववाणी संस्कृत के प्रचार प्रसार के लिए समर्पित भाव से प्रयत्नशील, ज्योतिषाचार्य महंत रोहित शास्त्री का | प्राचीन आचार्यों की उर्वरा भूमि रही इस जम्मूकश्मीर की धरती पर आज इक्कीसवीं शताब्दी में संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति के लिए सर्वथा समर्पित रोहित शास्त्री का उल्लेख किये बिना संस्कृत या संस्कृति की चर्चा अधूरी है।
इसी पावन व पवित्र भूमि पर प्रत्यभिज्ञादर्शन के संस्थापक आचार्य अभिनवगुप्त, महाकवि कल्हण, महाकवि बिल्हण, लगध मुनि, विष्णु शर्मा, नागसेन, तिसत, वाग्भट, भामह, रविगुप्त, वसुगुप्त, सोमानन्द, वटेश्वर, रुद्रट, जयन्त भट्ट, भट्टनायक, मेधातिथि, उत्पलदेव, वल्लभदेव, उत्पल, क्षेमराज, जल्हण, शारंगदेव, केशव भट्टाचार्य, मम्मट, कैय्यट, लोल्लट, कैहट, जैहट, रल्हण, शिल्हण, मल्हण, रुय्यक, कुन्तक, रुचक, उद्भट, शंकुक, गुणाढ्य, सोमदेव, पिंगल, जयदत्त, वामन, क्षीरस्वामी मंख, पुष्पदन्त, जगधर भट्ट, रत्नाकर आदि अनेकानेक प्राचीन संस्कृत मनीषियों का उद्भव हुआ है।
कौन है महंत रोहित शास्त्री
महंत रोहित शास्त्री का जन्म 19 मार्च 1987 ई. में गांव रायपुर बनतालाब, जम्मू (जम्मूकश्मीर) में हुआ | इनके पिता का नाम पंडित राधाकृष्ण तथा माता का नाम श्रीमती पोलीदेवी है | इन्होंने अपनी शिक्षा राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (अब सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी) श्री रणबीर परिसर, जम्मू से की तथा वर्ष 2010 में फलित ज्योतिष विषय से प्रथम श्रेणी में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। वर्ष 2009 इन्हें राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (अब सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी) के कुलपति द्वारा सर्वश्रेष्ठ छात्र पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।
देववाणी संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए इन्होंने वर्ष 2012 में श्रीकैलख ज्योतिषी एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट की स्थापना की जिसके वह संस्थापक अध्यक्ष हैं। इनका विवाह श्रीमती तन्वी से हुआ है। तथा इन्हें दो बेटे है। व्यावसायिक तौर पर भी देखा जाय तो महंत रोहित शास्त्री जी अपनी विद्वता से कर्मकांड एवं ज्योतिष के क्षेत्र में जब कभी भी टकराव होता है तब एक सफल निर्णायक के रूप में वे अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है उनके तर्क में प्रमाणिकता एक अछ्वुत कला है धार्मिक निष्ठा, ज्योतिषी,धार्मिक कृत्य एवं धर्म के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान ही इनका परिचय हुआ करता है वैदिक पूजा, अनुष्ठान इत्यादि में अपने कर्म में कभी विचलित नहीं होते है।
महंत रोहित शास्त्री ने प्रदेश में देववाणी संस्कृत को प्रतिदिन अग्रसर कर रहे हैं। इन्होंने कई पुस्तकें लिखी हैं तथा इनके कई लेख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। वह हर वर्ष 'कैलख संदेश पंचांग कैलेंडर' प्रकाशित एवं संपादन करते हैं और निशुल्क वितरण करते हैं। महंत रोहित शास्त्री द्वारा संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति को जन जन तक पहुंचाने का महत्त्वपूर्ण कार्य करते हुए समाज के उत्थान में अपनी विशिष्ट भूमिका निभाई रहे हैं |
महंत रोहित शास्त्री जी के अथक प्रयासों से जम्मू कश्मीर में आचार्य की डिग्री को मान्यता प्राप्त हुई। उनके ही प्रयासों से उपराज्यपाल द्वारा श्रीमाता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय, कटरा में संस्कृत विभाग की स्थापना को मंजूरी दी गई तथा मजीन जम्मू में बनने जा रहे तिरुपति बालाजी मंदिर में संस्कृत गुरुकुल की स्थापना को भी अनुमति दी गई है जिससे देववाणी संस्कृत को प्रदेश में बढ़ावा मिला है। उनके ही प्रयासों से जम्मू कश्मीर में पहली बार पार्षदों,सरपंचों एवं डीडीसी सदस्यों ने देववाणी संस्कृत भाषा में शपथ ग्रहण की।
जम्मू कश्मीर सरकार ने उन्हें वर्ष 2019 में ड्रग डी एडिक्शन कमेटी का सदस्य भी मनोनीत किया गया था और अभी भी उस कमेटी के सदस्य हैं। और इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी के सदस्य भी हैं। महंत रोहित शास्त्री ने वाहन मोबाइल संस्कृत गुरुकुल भी शुरू किया है जो घर घर जाकर निशुल्क संस्कृत सिखा रहा है। उन्हें महामहिम राज्यपाल, माननीय लोक सभा, राज्य सभा सदस्यों तथा गणमान्य जनप्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यों में अभूतपूर्व योगदान हेतु सम्मानित किया गया है। आज़ादी के बाद राज्य पुरस्कार (स्टेट अवार्ड) पाने वाले पहले संस्कृत के विद्वान महंत रोहित शास्त्री हैं। समाज सुधारक एवं सशक्तिकरण श्रेणी में राज्य पुरस्कार (स्टेट अवार्ड) मिला है।
प्रदेश में देववाणी संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने सन् 2017 को श्रीकैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट द्वारा पहले 'कैलख संस्कृत रत्न पुरस्कार' शरू किया हर वर्ष भव्य कार्यक्रम कर के एक संस्कृत के विद्वान को दिया जाता है।
ट्रस्ट द्वारा समय समय पर संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। कई वर्षो से भी अधिक समय तक विभिन्न क्षेत्रों में जाकर अपनी ओजस्वी वाणी से लोगों को रूढ़ियों से मुक्त करने के कार्य में लगे रहे। उन्होनें संस्कृत भाषा के साथ सामाजिक क्षेत्रों में भी लोकप्रियता हासिल की है महंत रोहित शास्त्री का जीवन धर्म, मानव सेवा को समर्पित है | शास्त्री का जीवन व्यवहारकुशलता व कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान है | समाजसेवा को धर्म का अभिन्न अंग मानने वाले महंत रोहित शास्त्री जी ने समाज के उत्थान के लिए कई कल्याणकारी कार्य किए और कर रहे हैं | समाज के हितों की रक्षा में उनका योगदान सदैव ही प्रशंसनीय है |
जम्मू कश्मीर में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए वह इन विषयों पर काम कर रहे हैं वह मुख्य इस प्रकार है
राजस्थान प्रदेश की तर्ज पर जम्मू कश्मीर में भी संस्कृत मंत्रालय की स्थापना की जाय | जम्मू कश्मीर के स्कूलों में प्रथम कक्षा संस्कृत भाषा अनिवार्य किया हो|
उत्तर प्रदेश की तर्ज पर जम्मू कश्मीर संस्कृत अकादमी,जम्मू कश्मीर में अभिनवगुप्त संस्कृत संस्थान,संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना हो|
सेंट्रल यूनिवर्सिटी जम्मू कश्मीर एवं बाबा गुलाम बादशाह यूनिवर्सिटी राजोरी में संस्कृत विभाग की स्थापना हो।
उच्चशिक्षा वैदिक स्टडीज पदों को भरा जाये |
देववाणी संस्कृत को भी अन्य भाषाओं की तरह विशिष्ट दर्जा मिलना चाहिए |
संस्कृत स्कॉलर्स को स्कॉलरशिप और नौकरियों में रिज़र्वेशन कोटा मिलना चाहिए आदि की मांग की। डॉ उत्तम चंद शास्त्री पाठक संस्कृत सम्मान (स्टेट अवार्ड) देना शुरू करे ओर भी अन्य विषय है अगर सरकार महंत जी की इन मांगों को पूरा करे तो संस्कृत-सेवियों का मनोबल बढ़ेगा और ऐसे प्रयासों से प्रदेश में विलुप्त हुए संस्कृत धर्म-दर्शन की पुनर्प्रतिष्ठा सम्भव हो पाएगी |
देववाणी संस्कृत के बिना भारतीय संस्कृति एवं परम्परा का ज्ञान अधूरा है। संस्कृत को जैसा लिखा जाता है वैसा ही पढ़ा जाता है। संस्कृत भाषा के कई शब्द हिन्दी सहित अन्य कई भारतीय भाषाओं में भी इस्तेमाल किए जाते हैं। शब्दकोष संस्कृत से ही बढ़ता है। भाषा के माध्यम से ही मनुष्य सोचता है। इसलिए सोचने की भाषा को समृद्ध बनाने के लिए हमें महंत रोहित शास्त्री जी के दिखाए मार्ग पर चलना होगा।
महंत रोहित शास्त्री एवं उनके परिवार का भारत में संस्कृत भाषा के संवर्धन व विकास में अमूल्य योगदान रहा है। राष्ट्र में संस्कृत भाषा को अग्रसर करने में महंत रोहित शास्त्री का समर्पण सुप्रसिद्ध है। युवा पीढ़ी भी महंत रोहित शास्त्री जी का अनुसरण कर प्रदेश एवं राष्ट्र संस्कृति संरक्षण में अपना योगदान दें।