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लोकसभा चुनाव: कठुआ-जम्मू ट्रैक पर दो साल से 12 ट्रेनों का ठहराव बंद, मंत्री तक नहीं करवा पाए हल

Tue, 23 Apr 2024 06:15 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

कोरोना काल से पहले कालीबाड़ी रेलवे स्टेशन पर 12 रेलगाड़ियों का ठहराव था। बता दें कि सांबा में सिडको के तीन फेज हैं। इनमें कई तरह के उद्योग लगे हैं और इनमें कार्यरत ज्यादातर अधिकारी व कर्मचारी बाहरी राज्यों से हैं।
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स्टेशन पर खड़ी ट्रेन (फाइल) - फोटो : संवाद
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विस्तार
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कालीबड़ी रेलवे स्टेशन पर दो साल से रेलगाड़ियों का ठहराव नहीं हो रहा। लोगों ने नताओं से ठहराव के लिए गुहार लगाई तो आश्वान मिला लेकिन काम नहीं हो पाया। कोरोना काल में बंद की गई सुविधा को स्थानीय नेता आज तक शुरू नहीं करवा पाए। नतीजनत लोगों को 50 किलोमीटर दूर कठुआ या फिर 42 किलोमीटर दूर जम्मू रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर वही रेलगाड़ी पकड़नी पड़ती है जो दो साल पहले स्थानीय स्टेशन पर रुका करती थीं।

कोरोना काल से पहले कालीबाड़ी रेलवे स्टेशन पर 12 रेलगाड़ियों का ठहराव था। बता दें कि सांबा में सिडको के तीन फेज हैं। इनमें कई तरह के उद्योग लगे हैं और इनमें कार्यरत ज्यादातर अधिकारी व कर्मचारी बाहरी राज्यों से हैं। उद्योगिक क्षेत्र होने के साथ सांबा सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यहां सेना की ब्रिगेड सहित बीएसएफ की तीन वाहिनी और एसएसबी का मुख्यालय भी है। 
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सांबा से सात किलोमीटर दूर नवनिर्मित एम्स है। ऐसे में सभी को सांबा रेलवे स्टेशन से ही आना-जाना रहता है। कोरोना काल में सांबा रेलवे स्टेशन पर यह कहकर रेलगाड़ियों का ठहराव बंद कर दिया गया था कि यहां पर यात्रियों के सैंपल लेने के लिए प्रबंध नहीं हैं। कोरोना खत्म हो गया लेकिन रेलगाड़ियों का ठहराव शुरू नहीं हो पाया। इससे जम्मू में रेलगाड़ी पकड़ने वाले लोगों को 42 किलोमीटर और कठुआ में गाड़ी पकड़ने वालों को 50 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है। इसमें पैसे के साथ समय की भी बर्बादी हो रही है।

कोरोना से पहले छह स्टेशनों पर रुकती थीं गाड़ियां, अभी एक पर भी ठहराव नहीं

कोरोना काल से पहले घगवाल, हीरानगर, दियालाचक, बुद्धी , विजयपुर और बाड़ी ब्रह्मणा जैसे छह स्टेशनों पर रेलगाड़ियो का ठहराव था लेकिन आज यहां एक भी गाड़ी नहीं रुक रही। डीएमयू जरूर रुकती है। हीरानगर के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को इसका लाभ मिलता था। 

घगवाल निवासी एवं पूर्व बीडीसी अध्यक्ष विजय टंगोत्रा ने बताया कि घगवाल रेलवे स्टेशन पर कोरोना काल से पहले हेमकुंट एक्सप्रेस, जम्मू मेल, शियालदा एक्सप्रेस का ठहराव था अब यह तीनों ही गाड़ियां यहां नहीं रुकतीं। उन्होंने कहा कि घगवाल में एसएसबी, सीआरफीएफ की वाहिनी है। सैकड़ों लोग पहले यहां से चढ़ते व यहां उतरते थे। इन लोगों सहित अब आम लोगों को पठानकोट सहित दिल्ली जाने के लिए कठुआ या फिर जम्मू का रुख करना पड़ रहा है।

एम्स और केंद्रीय विश्वविद्यालय के बावजूद विजयपुर में ठहराव बंद

विजयपुर से आम आदमी पार्टी के नेता राजेश पडगोत्रा के अनुसार विजयपुर में कोरोना वायरस से पहले आठ रेलगाड़ियों का ठहराव था। आज एक भी नहीं रुक रही है। एम्स और केंद्रीय विश्वविद्यालय होने से रेलगाड़ियों के ठहराव की दृष्टि से विजयपुर महत्वपूर्ण स्टेशन है। दो बड़े संस्थान होने के कारण यहां पर रोजाना सैकड़ों लोगों और छात्रों का आवागमन है। ठहराव बंद होने से खासकर नौकरी पेशा व छात्रों को ज्यादा परेशानी बन रही है। 

उन्होंने मासिक पास बना रखे थे व आसानी से जम्मू जाते थे। अब उनके समय व धन दोनों की बर्बादी हो रही है। कठुआ से जम्मू तक के आधा दर्जन रेलवे स्टेशन बंद पडे़ हैं। वहीं हरिद्वार के लिए जाने वाली रेल का भी ठहराव नहीं होने से श्रद्वालु परेशान हैं। इन आधा दर्जन रेलवे स्टेशनों से हर रोज 1000 से अधिक लोगों का आना-जाना रहता था।
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प्रशासन से लेकर मंत्रियों तक ने समस्या हल नहीं की

हमने जिला प्रशासन, डिवकॉम, जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव, उप राज्यपाल, रेलवे के जनरल मैनेजर, केंद्रीय मंत्री शंतनु कुमार, केंद्रीय मंत्री नारायण तांत्रे, केंद्रीय मंत्री दर्शना जरदोश को भी लिखित में समस्या से अवगत करवाया है। मगर कोई उचित कदम नहीं उठाया गया है। -रविंद्र सिंह, पूर्व सरपंच

स्थानीय लोगों का रोजगार भी खत्म हो गया

सांबा के काली बड़ी रेलवे स्टेशन पर रेलों की आवाजाही से स्थानीय लोगों का रोजगार चल रहा था। यह दो वर्ष से चौपट होकर रह गया है। उन्होंने अपनी ओर से इस समस्या को उठाया था, मगर किसी ने कोई तरजीह नहीं दी। -कृष्ण लाल, पूर्व सरपंच काली बड़ी सांबा।

केंद्रीय मंत्री ने उधमपुर में वंदे भारत रुकवा दी मगर उनको अनदेखा किया

काली बड़ी रेलवे स्टेशन पर रेलों के ठहराव नहीं होने का मुद्दा लोकसभा चुनाव में भी उठाया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री रहे जितेंद्र सिंह ने कठुआ में वंदे भारत का ठहराव करवा दिया, जबकि सांबा की एक बार फिर से अनदेखी की जा रही है। -विनोद कुमार, पूर्व सरपंच रख अंब टाली सांबा

कश्मीर तक रेलगाड़ी पहुंचा रहे लेकिन ठहराव बहाल नहीं कर रहे

सांबा शूरवीरों की धरती है। जब भी कोई संघर्ष शुरू होता है तो सांबा से ही होता है। सांबा की अनदेखी की जा रही है। कश्मीर में रेल पहुंचाई जा रही है, इसका हम स्वागत करते हैं। मगर सांबा रेलवे स्टेशन पर जो रेलगाड़ियां रुकती थीं उन्हें क्यों नहीं बहाल किया जा रहा है। -सुग्रीब सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता सांबा
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