नेकां हिंसा की सबसे ज्यादा हुई शिकार
अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में बंदूक संस्कृति से होने वाले नुकसान पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस हिंसा का सबसे ज्यादा शिकार हुई है। उन्होंने कहा, 'वे अच्छी तरह से जानते हैं कि बंदूक संस्कृति कहां से आई। नेशनल कॉन्फ्रेंस से ज्यादा कोई पार्टी इस बंदूक संस्कृति का शिकार नहीं हुई है। हमने 4,000 से अधिक वरिष्ठ कार्यकर्ताओं, पार्टी पदाधिकारियों और पूर्व विधायकों को खो दिया है।'
मिंया अल्ताफ के साथ गुरुवार को इंडिया गठबंधन की तरफ से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम अहमद मीर भी पहुंचे। मीर ने कहा कि जनता भाजपा की नीतियों से त्रत्स है। उन्हें यकीन है कि इस बार जनता इंडिया गठबंधन के पक्ष में मत करेगी। मीर ने कहा, 'जम्मू-कश्मीर को इंडिया गठबंधन और एनडीए के बीच सीधा मुकाबला है। इस बार तीसरे, चौथे या पांचवें दलों के लिए कोई गुंजाइश नहीं है। जम्मू-कश्मीर के लोग राजनीतिक रूप से काफी परिपक्व हैं।' उन्होंने विश्वास जताया कि कांग्रेस उम्मीदवार जम्मू क्षेत्र की दोनों लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करेंगे।
महबूबा के चुनाव लड़ने पर क्या बोले मीर
उन्होंने यह भी कहा कि पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती का चुनाव लड़ना इंडिया गठबंधन के लिए कोई झटका नहीं है। इस सीट के लिए नेकां और पीडीपी को ही मिलकर करना था। क्योंकि यह शुरू से ही समझा गया था कि इंडिया गठबंधन के घटक दल उन सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे, यहां उन्होंने 2019 के चुनावों में जीता हासिल की थी। घाटी की सीटें पिछली बार नेकां ने जीती थीं। ऐसे में यह फैसला पीडीपी और नेकां के बीच ही होना था। अगर यह सीट कांग्रेस के पास होती, तो हम पीडीपी को समायोजित करने के लिए इसका त्याग करने को तैयार होते। अब मियां अल्ताफ इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार हैं।
मीर ने आरोप लगाया कि भाजपा ने हर चुनाव में किसी न किसी धार्मिक मुद्दे का इस्तेमाल करने की कोशिश की है ताकि उसे अपने शासन के लिए जवाब न देना पड़े। यह पहला चुनाव है जिसमें भाजपा देश के सामने मौजूद वास्तविक मुद्दों से भटकाने की रणनीति में सफल नहीं हो पाई है।