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लद्दाख: सोनम वांगचुक ने अब 'इंट्रा-कंट्री रोड मार्च' का किया एलान, स्थानीय चरवाहों की जानेंगे समस्याएं

Mon, 15 Apr 2024 05:19 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

लेह एपेक्स बॉडी के एक प्रमुख सदस्य वांगचुक ने कहा कि उनकी हालिया बैठक में 17 अप्रैल को उप्शी गांव से अपना मार्च शुरू करने का फैसला किया गया है, जिसमें नेताओं का एक छोटा समूह जागरूकता बढ़ाने के लिए गांवों से गुजरते हुए चांगथांग तक मार्च शुरू करेगा। 
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sonam wangchuk (File) - फोटो : वीडियो ग्रैब
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विस्तार
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पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने एलान किया है कि जमीनी स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लेने के लिए लद्दाख-हिमाचल प्रदेश सीमा पर स्थित स्कांगचू-थांग (चांगथांग) की ओर 17 अप्रैल को 'इंट्रा-कंट्री रोड मार्च' शुरू करेंगे। 

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जिला प्रशासन की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) द्वारा सीमा मार्च को स्थगित करने के एक हफ्ते से भी कम समय के भीतर उन्होंने रविवार को घोषणा की है। वह डॉ बीआर आंबेडकर की जयंती के अवसर पर एक सभा को संबोधित कर रहे थे।

वांगचुक ने कहा, चूंकि लद्दाख चीन और पाकिस्तान की सीमा से सटा एक संवेदनशील क्षेत्र है, इसलिए हम कानून और व्यवस्था के संबंध में सरकार की आशंका को समझ सकते हैं और यही संभावित कारण है कि सरकार ने ‘पशमीना मार्च’ से पहले कड़े प्रतिबंध लगाए। लेकिन दो-तीन दर्जन लोग पैदल हमारे अपने देश के क्षेत्राधिकार में घूम रहे हैं और यह किसी के लिए चिंता का कारण नहीं होना चाहिए, खासकर सरकार के लिए। 
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उन्होंने बताया कि इस रोड मार्च का उद्देश्य स्कांगचू-थांग में स्थानीय चरवाहों की शिकायतों को सुनना है, जो दशकों से इस क्षेत्र में मवेशी चरा रहे हैं और अब कथित तौर पर उद्योगपति द्वारा भूमि अधिग्रहण के बाद उन्हें भूमि छोड़ने के लिए कहा गया है।

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उप्शी गांव से शुरू किया जाएगा मार्च

लेह एपेक्स बॉडी के एक प्रमुख सदस्य वांगचुक ने कहा कि उनकी हालिया बैठक में 17 अप्रैल को उप्शी गांव से अपना मार्च शुरू करने का फैसला किया गया है, जिसमें नेताओं का एक छोटा समूह जागरूकता बढ़ाने के लिए गांवों से गुजरते हुए चांगथांग तक मार्च शुरू करेगा। 

वांगचुक ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए उद्योगपतियों को 40,000 एकड़ भूमि के आवंटन पर चिंताओं को उजागर किया, जिससे लद्दाख में पहले से ही सीमित चारागाह क्षेत्र और सिकुड़ गया। इस मार्च का उद्देश्य लद्दाख में लोगों को एक संदेश देना है और संविधान की अनुसूची छह के तहत किसी भी सुरक्षा के अभाव में लद्दाखी लोग अपनी मातृभूमि खो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि एलएबी ने खेती की गतिविधियों और पर्यटन को प्रभावित किए बिना शृंखलाबद्ध भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन के माध्यम से चल रहे संघर्ष को जारी रखने का फैसला किया है, जो वसंत की शुरुआत के साथ बढ़ना शुरू हो गया है।
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