मई में शुरू हुआ कारगिल युद्ध जुलाई में निर्णायक मोड़ ले रहा था। दो और तीन जुलाई की दरमियानी रात बटालिक सब सेक्टर की खलुबार चोटी को हासिल करने की चुनौती बेहद जोखिम भरी थी। कमान अधिकारी कर्नल राय के नेतृत्व वाली टुकड़ी ने दुश्मन की मशीनगन और आरपीजी फायर के बावजूद आगे बढ़ना जारी रखा।
तीन जुलाई को खलुबार चोटी की ओर बढ़ती सैन्य कंपनी के लिए मुश्किलें खड़ी करते दुश्मन से निपटने का जिम्मा लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे को मिला। उनकी पलटून अपने लक्षित स्थान पर पहुंची ही थी कि ऊंचाई वाले सटे इलाकों से भीषण फायरिंग शुरू हो गई। लेफ्टिनेंट पांडे ने पलटून को तुरंत सुरक्षित स्थान की ओट दिलाई।
निडरता के साथ उन्होंने दुश्मन की पहली पोजीशन पर धावा बोलकर दो दुश्मन ढेर कर दिए। खुद जाकर उन्होंने दूसरी पोजीशन पर भी हमला बोलकर दो और दुश्मन मार गिराए। माथे पर गोलियों की बौछार से घायल होने के बावजूद तीसरी पोजीशन क्लियर करने के बाद उन्होंने दुश्मन की चौथी पोजीशन को ग्रेनेड से उड़ा दिया।