दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में शुक्रवार को मस्जिद से भागने की कोशिश कर रहे आतंकियों ने उसके एक हिस्से में आग लगा दी थी। 1990 के बाद यह आतंकियों के खिलाफ यह सबसे बड़ा ऑपरेशन है जब एक साथ पांच आतंकी मारे गए हैं। इससे पहले 1990 में चार आतंकी एक साथ मारे गए थे। अधिकारियों ने बताया कि मस्जिद के आसपास ऑपरेशन के दौरान काफी तनावपूर्ण माहौल था।
आतंकी अंदर छिपे हुए थे सुरक्षा बल उन्हें बाहर निकालना चाहते थे। मस्जिद के बाहर स्थानीय लोग जमा थे। सुरक्षा बलों के लिए यह काम चुनौती पूर्ण था परंतु जवानों ने प्रोफेशनल स्किल अपनाते हुए ऑपरेशन पूरा किया। सुरक्षा बल इन आतंकियों का आत्मसमर्पण करवाना चाहते थे। वीरवार रात और शुक्रवार दोपहर के बीच कई घंटे तनाव के बीच गुजरे। जामा मस्जिद में छिपे आतंकियों से आत्म समर्पण के लिए नागरिकों और सेना के जवानों ने आत्मसमर्पण की अपील की।
आतंकियों के परिवार वालों को अंदर भेजा गया परंतु कोई सफलता नहीं मिली। आतंकियों को आत्मसमर्पण करने के 17 मौके दिए गए। इन आतंकियों के परिवार वाले इस इलाके के रसूखदार लोग हैं। आखिरकार शुक्रवार दोपहर सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन को अंजाम देकर इन्हें मार गिराया। इस दौरान यह ध्यान रखा कि मस्जिद को कम से कम नुकसान पहुंचे।
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देश के खिलाफ हथियार उठाया तो जवाब मिलेगा
दक्षिण और मध्य कश्मीर में आतंक विरोधी ऑपरेशनों की कमान संभालने वाले विक्टर फोर्स के कमांडर मेजर जनरल, जर जनरल रशीम बाली कहते हैं कि दहशतगर्दों तक यह स्पष्ट संदेश पहुंचना चाहिए कि देश के खिलाफ हथियार उठाना कोई विकल्प नहीं है इसका उपयुक्त जवाब दिया जाएगा। तीन आतंकवादियों को भोर में मार दिया गया था, अन्य दो को शुक्रवार दोपहर 2 बजे मार गिराया गया।
ड्रोन से रखी आतंकियों की हरकतों पर नजर
आतंकवादियों की हरकतों पर कड़ी नजर रखने के लिए ड्रोन तैनात किए गए थे। ऑपरेशन के बाद सैनिकों ने मस्जिद को साफ कर दिया। सभी धार्मिक पुस्तकों को स्थानीय प्रशासन को सौंप दिया गया है।