जम्मू-कश्मीर समेत पूर्वोत्तर राज्यों में संसदीय एवं विधानसभा सीटों के परिसीमन के लिए गठित परिसीमन आयोग का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया है। बुधवार देर रात इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई।
एक वर्ष के लिए बढ़ाए गए कार्यकाल में अब परिसीमन पैनल केवल जम्मू-कश्मीर की विधानसभा सीटों की हदबंदी का काम देखेगा। परिसीमन आयोग का गठन मार्च 2020 में किया गया था। आयोग को जम्मू-कश्मीर, असम, मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में परिसीमन का जिम्मा दिया गया था।
नई अधिसूचना में असम, मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश राज्यों के नाम हटा दिए गए हैं। यानी पैनल अब सिर्फ जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों के परिसीमन के लिए काम करेगा। वर्ष 2020 में लोकसभा अध्यक्ष ने परिसीमन आयोग में 15 सांसदों को एसोसिएट सदस्य के रूप में शामिल किया था। केंद्रीय मंत्रियों किरेन रिजिजू और डॉ. जितेंद्र सिंह को भी सदस्य बनाया गया था। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में विधानसभा नहीं है।
केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद यहां केवल विधायिका का प्रावधान है। केंद्र ने 6 मार्च 2020 को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में परिसीमन आयोग का गठन किया था। चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा, जम्मू-कश्मीर व चार अन्य राज्यों के चुनाव आयुक्तों को एक्स ऑफिशियो (पदेन) सदस्य बनाया था। अब मुख्य चुनाव आयुक्त और जम्मू-कश्मीर के चुनाव आयुक्त ही एक्स ऑफिशियो सदस्य होंगे।
18 फरवरी को हुई थी पहली बैठक
पिछले वर्ष गठित आयोग की पहली बैठक 18 फरवरी को नई दिल्ली में हुई थी। इस बैठक में नेकां सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला, हसनैन मसूदी व मोहम्मद अकबर लोन शामिल नहीं हुए थे। उनका तर्क था कि पार्टी ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है, इस वजह से बैठक में शामिल होना संभव नहीं है। जबकि जम्मू-कश्मीर के सांसद डॉ. जितेंद्र सिंह व जुगल किशोर शर्मा बैठक में शामिल हुए थे। बैठक में शामिल सांसदों ने सुझाव दिया कि जनसंख्या को ही केवल आधार न बनाया जाए बल्कि भौगोलिक परिस्थितियों तथा दूरदराज के इलाकों का भी परिसीमन करते समय ध्यान रखा जाए।