आरएस पुरा। परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के खिलाफ विभिन्न संगठन एक साथ उतर आए हैं। आरएस पुरा से भाजपा के दर्जनों पदाधिकारी इस्तीफा दे चुके हैं। बुधवार को विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने एकजुट होकर परिसीमन आयोग कमेटी व सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
कांग्रेस नेता चौ. मोहन सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शन के दौरान डीडीसी सदस्य सुचेतगढ़ तरणजीत सिंह टोनी, नेकां जिला प्रधान नरेश बिट्टू, कांग्रेस नेता पवन रैना, पूर्व सांसद तरलोक सिंह बाजवा, ऑल इंडिया जाट महासभा प्रधान चौ. मनमोहन सिंह आदि नेता शामिल रहे।
कस्बे में महात्मा गांधी पार्क में एकजुट होकर परिसीमन आयोग व सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि अगर जल्द से जल्द आयोग ने इस फैसले में बदलाव नहीं किया तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने परिसीमन आयोग तथा केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि भाजपा के इशारे पर ही आयोग की टीम ने ऐसी रिपोर्ट बनाई।
डीडीसी सदस्य तरणजीत सिंह टोनी ने कहा कि सुचेतगढ़ विधानसभा की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 में नेकां व कांग्रेस की गठबंधन सरकार ने सीमावर्ती लोगों को सुचेतगढ़ विधानसभा क्षेत्र दिया था, जिसे अब खत्म किया गया। यही नहीं 26 साल से आरक्षित चल रही आरएस पुरा विधानसभा क्षेत्र को दोबारा से आरक्षित किया गया। जो धारा 14 का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में जाट व सिख समाज को पूरी तरह से नजर अंदाज किया गया है।
कांग्रेस नेता चौ. मोहन सिंह ने कहा कि यह रिपोर्ट बंद कमरों में बैठ कर बना दी गई है। यह भी नहीं देखा गया कि आखिर कौन सा क्षेत्र कहां है और कहां नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक साजिश के तहत सुचेतगढ़ विधानसभा क्षेत्र को समाप्त किया गया है। इसको सहन नहीं किया जाएगा।
पूर्व सांसद सरदार तरलोक सिंह बाजवा ने कहा कि आयोग ने जो रिपोर्ट पेश की है वो सरासर भाजपा को लाभ पहुंचाने वाली बनाई गई है। इसमें लोगों की राय की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेषत: जाट व सिख समाज को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। अन्य वक्ताओं ने भी आयोग की इस रिपोर्ट को पूरी तरह से जनता विरोधी बताया और चेतावनी दी गई अगर इस रिपोर्ट को बदला नहीं गया तो इसको लेकर उपजिले में विरोध प्रदर्शन किया जएगा, जिसके लिए केंद्र सरकार की गलत नीतियां जिम्मेदार होगी। इस दौरान काफी संख्या में पंचों व सरपंचों सहित कई ग्रामीण भी मौजूद थे।
प्रदर्शन के दौरान भिड़े नेता
आरएस पुरा । महात्मा गांधी पार्क में परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के खिलाफ एकजुट हुए ऑल पार्टी नेताओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ नेता आपस में ही भिड़ गए। एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते हुए दो पक्षों में हाथापाई की नौबत तक आ गई। समय रहते अन्य मौजूद नेताओं व लोगों ने बीच-बचाव किया। परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के खिलाफ एकजुट हुए नेताओं में हुई तकरार के बाद लोगों में काफी चर्चा रही। लोगों द्वारा कहते हुए सुना गया कि आखिर इस तरह यह लोग एक साथ कैसे लड़ पाएंगे। हुआ यूं कि कार्यक्रम में मौजूद एक नेता को दूसरे नेता ने माइक पर संबोधन करते समय माइक छीन लिया। इस पर वह नेता आग बबूला हो गए। इसके बाद दोनों के समर्थक भी बीच में आ गए और हाथापाई की नौबत आ गई। वहां मौजूद अन्य वरिष्ठ नेताओं ने बीच बचाव करने पर माहौल शांत किया।
पंगदौर में भी प्रदर्शन, चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी
सांबा। पंगदौर में रीना चौधरी के नेतृत्व में भी स्थानीय लोगों ने आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि आयोग ने अपने निर्णय को नहीं बदला तो स्थानीय लोग आगामी होने वाले विधानसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार कर देंगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका गांव भारत-पाकिस्तान सीमा से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर है। ऐसे में उन्हें बॉर्डर विधानसभा सीट से बाहर कर दिया गया है। इसको वह सहन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में अधिकतर स्वर्ण जाति के लोग हैं। एक साजिश के तहत विधानसभा सीट को आरक्षित किया गया है। इसके लिए वह लोग सड़कों पर उतरकर सरकार व आयोग के खिलाफ धरना प्रदर्शन करेंगे। प्रदर्शन में भाजपा किसान मोर्चा के मदन चौधरी, सत्या कौर के अतिरिक्त काफी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं।