उसे एक पैर पर संतुलन बनाते हुए 2 किमी की दूरी तय करनी होती है। समाचार एजेंसी एएनआई को परवेज ने बताया कि सड़कें अच्छी नहीं हैं। अगर मुझे कृत्रिम अंग मिल जाए, तो मैं चल सकता हूं। जिंदगी में कुछ हासिल करने का है सपना।
जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में अपने सपनों को साकार करने के लिए दिव्यांग लड़का एक पैर पर स्कूल जाता है। उसे एक पैर पर संतुलन बनाते हुए 2 किमी की दूरी तय करनी होती है।
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समाचार एजेंसी एएनआई को परवेज ने बताया कि सड़कें अच्छी नहीं हैं। अगर मुझे कृत्रिम अंग मिल जाए, तो मैं चल सकता हूं। जिंदगी में कुछ हासिल करने का है सपना।
मदद का दिया भरोसा
इस पर जयपुर फुट यूएसए के चेयरमैन प्रेम भंडारी ने कहा कि जैसे ही मैंने एएनआई का ट्वीट पढ़ा, मैंने परिवार से संपर्क करने का फैसला किया। मैं परवेज को मुफ्त में कृत्रिम अंग प्रदान करूंगा।