जम्मू। बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय (बीजीएसबीयू) राजोरी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जम्मू में जनजातीय चेयर स्थापित होगी। इसके लिए प्रदेश जनजातीय विभाग और इन संस्थानों के बीच करार हुआ है। यह समझौता रविवार को एसकेआईसीसी श्रीनगर में आयोजित कार्यक्रम में हुआ। इस कार्यक्रम में उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने खेल, शिक्षा, संस्कृति, साहित्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जनजातीय कल्याण में योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थानों को पहले जनजातीय पुरस्कार से सम्मानित किया।
श्रीनगर में आयोजित कार्यक्रम में उप-राज्यपाल ने कहा कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और पंजाब नेशनल बैंक द्वारा प्रस्तावित वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम के तहत 500 जनजातीय युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रदेश सरकार जनजातीय समुदायों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। समुदाय के युवाओं और महिलाओं के बीच उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। शिक्षा, ग्राम विकास, पर्यटन, वन धन को उनके सशक्तीकरण के लिए लागू किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने जनजातीय गांवों के लिए 41 एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाई। साथ ही वेब पोर्टल, जनजातीय हेल्पलाइन नंबर, कौशल विकास कार्यक्रम, स्मार्ट सर्वे एप और टेली-परामर्श सुविधा शुरू की। अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब और टीआरआई न्यूजलेटर का पहला संस्करण और ‘खानाबदोश’ नामक पुस्तक का विमोचन किया। इस दौरान मुख्य सचिव डॉ. अरुण कुमार मेहता, जनजातीय कार्य विभाग के सचिव डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी मौजूद रहे।
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प्रदेश में 100 वनधन केंद्र स्थापित होंगे
उप-राज्यपाल ने कहा कि लंबे इंतजार के बाद सरकार ने प्रदेश में वन कानून को लागू किया है। जनजातीय परिवारों की स्थायी आजीविका के लिए प्रशासन जम्मू- कश्मीर में 100 वन धन केंद्र स्थापित कर रहा है। जनजातीय समुदाय की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र और सशक्त बनाने के लिए 1500 वन धन स्वयं सहायता समूह भी शुरू कर रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार जनजातीय समुदाय के आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को उच्च चरागाह क्षेत्र में रहने वाली आबादी की स्वास्थ्य देखभाल के लिए नियुक्त किया जा रहा है। शिक्षा को महत्व देते हुए छात्रवृत्ति का बजट 31 करोड़ से बढ़ाकर 40 करोड़ रखा है।
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