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कश्मीर से जम्मू लौटे पीएम पैकेज के 70 फीसदी कर्मचारी,

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जम्मू। अनुच्छेद 370 हटने के समय कश्मीरी घाटी में थोड़ा असुरक्षा का माहौल था, लेकिन समय से हालात सामान्य होने लगे थे। कश्मीरी नागरिकों के साथ पीएम पैकेज के तहत कश्मीर संभाग के विभिन्न जिलों में तैनात कर्मचारियों में सुरक्षा का भाव बढ़ रहा था, जम्मू की तरह बेखौफ अपने रोजमर्रा के कामों में लग जाते थे, लेकिन लगातार हुए आतंकी हमलों ने इन सभी उम्मीदों को खत्म कर दिया और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया। यह बात पीएम पैकेज के तहत कश्मीर घाटी में तैनात एक सरकारी कर्मचारी ने कही।
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कर्मचारियों ने कहा कि कश्मीर संभाग में 4 हजार के करीब युवा पीएम पैकेज के तहत सरकारी नौकरियों में हैं। सात अक्तूबर की घटना के बाद 70 फीसदी कर्मचारी जम्मू वापस लौट आए हैं। एक कर्मचारी ने कहा कि पांच सालों से नौकरी कर रहा हूं, लेकिन पहले कभी ऐसा माहौल और डर नहीं देखा था। परिवार की चिंता भी इस आतंकी हमले के डर को बयां करती है। सरकारी स्कूल में तैनात कश्मीरी पंडित शिक्षक ने कहा कि धर्म देखकर हत्या करना मानवता के खिलाफ काम है। उन्होंने कहा कि सरकारी कैंप में रहने वाले कर्मचारी वहीं पर है, लेकिन किराए के आवास में रहने वाले सभी कर्मचारी वापस लौट चुके हैं। इसमें आरक्षति वर्ग के कर्मचारी भी हैं जो कश्मीर संभाग में तैनात हैं। इस माहौल के बाद घाटी के लिए वापसी पहले जैसी सामान्य नहीं होगी, अब वह असुरक्षा का भाव हमारे मन में हमेशा रहेगा।
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स्थानीय कर्मचारी के साथ परिवार जैसा संबंध
पीएम पैकेज के तहत लगे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने कहा कि स्थानीय लोगों और कर्मचारियों के साथ हमारे परिवार जैसे रिश्ते हैं। किराए के आवास पर रहने या स्थानीय कर्मचारी के साथ काम करने के दौरान कभी असुरक्षा का भाव मन में पैदा नहीं हुआ। वह हमारी हर स्तर पर मदद करते हैं। उनके पारिवारक समारोह में हम शामिल होते हैं, लेकिन कुछ लोग वहां के आपसी भाईचारे को खत्म करने की कोशिश में लगे हैं।
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कोट
घाटी में चार हजार के करीब कर्मचारी पीएम पैकेज के तहत नियुक्त हैं, इनमें से जो कर्मचारी सरकारी आवास में रह रहे हैं, वह वहीं पर हैं। किराये के आवास पर रहने वाले कुछ कर्मचारी वापस जम्मू लौटे हैं। हमने सभी कर्मचारियों से वापस न लौटने की बात कही है। सरकार उन्हें पूरी तरह से सुरक्षा मुहैया करा रही है।
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-अशोक पंडिता, राहत आयुक्त, जम्मू
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