केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में 1500 करोड़ रुपये की झेलम-तवी बाढ़ रिकवरी परियोजना को पूरा करने की समय सीमा 31 दिसंबर, 2024 तक बढ़ा दी गई है। विश्व बैंक ने इसे बढ़ाने के फैसले पर मुहर लगा दी है।
यह विश्व बैंक द्वारा परियोजना का पांचवां विस्तार है। 2015 में स्वीकृत, परियोजना की मूल समापन तिथि 30 जून, 2020 को चौथी बार विस्तार दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप संचयी विस्तार अवधि 42 महीने हो गई है।
आर्थिक पुनर्निर्माण एजेंसी ने 11 दिसंबर, 2023 को एक पत्र लिखकर वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) को 12 महीने के विस्तार का अनुरोध किया। इसके बाद समय सीमा बढ़ा दी गई। डीईए ने 12 दिसंबर, 2023 को अपने पत्र में परियोजना कार्यान्वयन इकाई के अनुरोध का समर्थन करते हुए विश्व बैंक से एक साल का विस्तार देने का अनुरोध किया।
पीडीपी-भाजपा सरकार के दौरान बहुत धीमी शुरुआत के बाद, सैयद आबिद रशीद शाह द्वारा परियोजना कार्यान्वयन इकाई के प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के बाद परियोजना के प्रदर्शन में लगातार सुधार हुआ।
विश्व बैंक के अनुसार, परियोजना ने कुछ मामलों में अपने सहमत लक्ष्यों को पार कर लिया है। परियोजना की नवीनतम कार्यान्वयन स्थिति और परिणाम रिपोर्ट में कहा गया है कि जेटीएफआरपी जम्मू-कश्मीर में बाढ़ से जुड़े जोखिमों को ठीक करने और कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है है। परियोजना ने बड़े पैमाने पर इसे हासिल कर लिया है और कुछ मामलों में सहमत लक्ष्यों को पार कर लिया है।
परियोजना के तहत प्रमुख उपलब्धियों में 45 स्कूल भवन, चार उच्च शिक्षा भवन, एक फायर स्टेशन, 87.88 किमी सड़क खंड, चार पुल, 75 किमी जल निकासी नेटवर्क, 33 तूफान-जल निकासी पंपिंग स्टेशन और 36 अस्पतालों को महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण की आपूर्ति शामिल है।
झेलम तवी बाढ़ रिकवरी परियोजना सितंबर 2014 में आई बाढ़ के बाद जम्मू और कश्मीर में शुरू की गई थी। इस बाढ़ से घाटी में अनंतनाग, श्रीनगर और आसपास के जिलों के निचले इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया था। इस परियोजना का उद्देश्य बाढ़ से बाधित जरूरी सेवाओं को बहाल करना और इससे उबरने के लिए डिजाइन मानक और प्रथाओं में सुधार करना है।