डोडा हादसे में बस के परखच्चे उड़ गए थे (फाइल)
- फोटो : अंजना ठाकुर
मुगल रोड, बटोत-डोडा-किश्तवाड़ और रामबन में लगातार हो रहे सड़क हादसों पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एन कोटेश्वर सिंह और न्यायमूर्ति मोक्षा खजूरिया काजमी की खंडपीठ ने गंभीर रुख अपनाया है। खंडपीठ ने हादसों को रोकने के लिए चार सदस्यीय एक विशेषज्ञ कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है।
यह कमेटी इन इलाकों का दौरा कर लगातार हो रही दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाएगी। खंडपीठ सड़क हादसों के संबंध में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
उच्च न्यायालय के आदेश पर गठित होने वाली कमेटी में सड़क सुरक्षा में विशेषज्ञता रखने वाले आईआईटी जम्मू के प्रोफेसर, मुख्य अभियंता संपर्क द्वारा नामित एक इंजीनियर, मुख्य अभियंता पीडब्ल्यूडी (आरएंडबी) जम्मू की ओर से नामित एक कार्यकारी अभियंता और जम्मू विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के पूर्व एचओडी प्रोफेसर डॉ. जीएम भट्ट को शामिल करने के लिए कहा गया है। प्रो. भट्ट को राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाले भूस्खलन के मामलों में विशेषज्ञता हासिल है।
मंडलायुक्त को समन्वय की जिम्मेदारी
अदालत ने मंडलायुक्त को विशेषज्ञ समिति के कामकाज के बीच समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। कोर्ट ने ये महत्वपूर्ण निर्देश इंतिखाब अहमद काजी, बार एसोसिएशन डोडा और आसिफ इकबाल भट द्वारा दायर तीन जनहित याचिकाओं पर जारी किए हैं। इन याचिकाओं में पीर पंजाल और चिनाब क्षेत्र में लगातार सड़क हादसों को उजागर किया गया था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शेख शकील अहमद, सैयद असीम हाशमी, राहुल रैना, सुप्रिया चौहान, एम जुल्कारनैन चौधरी, सूरज सिंह, सैयद माजिद शाह और अदनान मुश्ताक जराल उपस्थित हुए, जबकि सरकार की तरफ से अधिवक्ता विशाल शर्मा, डीएसजीआई और सीनियर एएजी एसएस नंदा मौजूद थे।