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JK Assembly Election: भाजपा के इस कदम से जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव की बंधी आस, जल्द मिल सकती है नई सरकार

Tue, 18 Jun 2024 12:13 PM IST
kumar गुलशन कुमार डॉ. बृजेश कुमार सिंह, जम्मू

सार

जम्मू-कश्मीर में नवंबर-दिसंबर 2014 में विधानसभा चुनाव हुए थे। जून 2018 में भाजपा के समर्थन वापस ले लेने से पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार गिर गई थी। तबसे यहां निर्वाचित सरकार नहीं है।
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चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भाजपा की ओर से जम्मू-कश्मीर के लिए चुनाव प्रभारी घोषित किए जाने के बाद राजनीतिक दलों की ओर से अब विधानसभा चुनाव की तैयारियां अगले कुछ दिनों में शुरू होने की संभावना प्रबल हो गई है। अवाम को लगभग एक दशक के लंबे अंतराल पर चुनाव और छह साल बाद नई सरकार मिलने की आस बंधी है। 

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हालांकि, भाजपा की राह में मुश्किलें भी कम नहीं होंगी। जम्मू-कश्मीर में नवंबर-दिसंबर 2014 में विधानसभा चुनाव हुए थे। जून 2018 में भाजपा के समर्थन वापस ले लेने से पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार गिर गई थी। तबसे यहां निर्वाचित सरकार नहीं है।

जम्मू में कितीन सीटें, कश्मीर में कितनी

जम्मू संभाग में विधानसभा की 43 सीटें हैं, जबकि कश्मीर में 47 सीटें हैं। बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा को 43 में से 14 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। 

उधमपुर व जम्मू लोकसभा सीट के सात विधानसभा हलकों भद्रवाह, डोडा, बनिहाल, इंद्रवल, आरएस पुरा-जम्मू दक्षिण, सुचेतगढ़, गुलाबगढ़ पर कांग्रेस से उसे कम मत मिले थे, तो राजोरी-पुंछ जिले की सात सीटों मेंढर, पुंछ हवेली, सुरनकोट, थन्नामंडी, बुद्धल, राजोरी व नौशेरा पर नेकां से हार का सामना करना पड़ा था।

भाजपा को 2019 की तुलना में लगभग 22 फीसदी का नुकसान हुआ था। 2019 में उसे 46.39 प्रतिशत मत मिले थे। क्षेत्रीय दलों नेकां और पीडीपी को फायदा हुआ था। नेकां को 15 व पीडीपी को पांच फीसदी का नफा मिला था। 2019 में दोनों पार्टियों को क्रमश: 7.89 व 3.40 प्रतिशत मत मिले थे।

राजोरी-पुंछ की भूमिका होगी निर्णायक

भाजपा की जीत में राजोरी-पुंछ की निर्णायक भूमिका होगी। यहां पहाड़ियों की आबादी अच्छी तादाद में है। पहाड़ियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देकर भाजपा ने उनकी लंबी मांग को पूरा किया है। ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि पहाड़ी समुदाय के मतदाता उनका साथ देंगे। सत्ता संतुलन के लिए बनाई गई नई लोकसभा सीट अनंतनाग-राजोरी में भाजपा ने उम्मीदवार न उतारकर अपनी पार्टी का समर्थन किया था। 

अपनी पार्टी को मिले 1.42 लाख में से 92521 मत इन्हीं दो जिलों से मिले थे। पार्टी का मानना है कि यदि कमल के निशान पर प्रत्याशी होंगे तो निश्चित रूप से पार्टी को फायदा होगा। हालांकि, नेकां यहां मजबूत स्थिति में रही और उसे 305863 मत हासिल हुए जो पार्टी प्रत्याशी को कश्मीर में मिले मत 215973 से लगभग 90 हजार अधिक रहा। पीडीपी को इन दो जिलों से 88459 मत मिले थे।
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लोकसभा चुनाव में पार्टियों को मिले मत
  • पार्टी       मत           प्रतिशत
  • भाजपा    12,44,404   24.36%
  • कांग्रेस    9,90,182    19.38%
  • नेकां     11,39,084    22.30%
  • पीडीपी   4,33,049   8.48%

कश्मीर में भी घुसपैठ होगी

जम्मू संभाग के सभी 10 जिलों में पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी। डोडा, किश्तवाड़, रामबन, राजोरी-पुंछ में भी पार्टी अपना प्रदर्शन अच्छा करेगी। कश्मीर की सीटों पर भी घुसपैठ होगी। सरकार भाजपा के नेतृत्व में ही बनेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से जी किशनरेड्डी को चुनाव प्रभारी बनाए जाने का आभारी हूं। - रवींद्र रैना, अध्यक्ष-भाजपा।
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