सेना के रक्षा ढांचे की मजबूती के लिए बड़े स्तर पर निजी कंपनियों की मदद ली जा रही है। नई तकनीक से तैयार सुरक्षा ढांचे में हर साल एक हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस क्रम में एक कदम और बढ़ाते हुए जम्मू के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में उत्तर प्रौद्योगिकी संगोष्ठी 2023 का आयोजन होने जा रहा है। इसमें रक्षा ढांचा निर्माण से जुड़ी 250 कंपनियां अपने द्वारा तैयार उपकरणों को लेकर पहुंचेगी। इनमें 50 स्टार्ट अप भी होंगे। यह संगोष्ठी 11 से 13 सितंबर तक आईआईटी जम्मू में होगी।
जम्मू आईआईटी के अलावा देशभर के 8 आईआईटी की ओर से भी इसमें अपने तैयार किए गए उपकरण पेश किए जाएंगे। उत्तरी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंदया सेनगुप्ता ने हाल ही में इसकी जानकारी दी है। उनके साथ कर्मचारी कर्तव्य और क्षमता विकास, मुख्यालय उत्तरी कमान के मेजर जनरल एम बीके सिंह, आईआईटी जम्मू के निदेशक प्रोफेसर मनोज गौड़, सोयायटी ऑफ भारतीय रक्षा विनिर्माण के निदेशक सुधीर मिश्रा मौजूद रहे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय तकनीकी मंत्री, पीएमओ कार्यालय के केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंदर सिंह, चीफ ऑफ स्टाफ जनरल अनिल चौहान, चीफ आर्मी स्टाफ जनरल मनोज पांडे, जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा, लद्दाख के उप राज्यपाल बीडी मिश्रा समेत तमाम बड़े अफसर मौजूद रहेंगे। ऐसा पहली बार हो रहा है जब यह आयोजन सैन्य क्षेत्र के बाहर हो रहा है। पिछले साल इसका आयोजन उधमपुर उत्तरी कमान मुख्यालय में हुआ था।
जो है, जो चाहिए के अंतर कम करने में बड़ी छलांग
लेफ्टिनेंट जनरल अनिंदया सेनगुप्ता ने कहा कि उत्तरी कमान के सामने आने वाली परिचालन और रसद चुनौतियों के लिए अनुकूलित, समर्पित समाधान की आवश्यकता है, जबकि उत्तरी कमान ने पिछले वर्षों में हमारे पास जो है और जो हमें चाहिए, उसके बीच के अंतर को पाटने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। इस साल का नॉर्थ टेक संगोष्ठी इस प्रयास को मजबूत करने वाली एक बड़ी छलांग है। इस वर्ष का नार्थ टेक सेना के आधुनिकीकरण के लिए अनुसंधान, विकास और नवाचार में तालमेल विषय पर है।
मेक इन इंडिया पर जोर
सेनगुप्ता ने कहा कि रक्षा बलों की आधुनिकीकरण योजना मेक-इन-इंडिया अनुसरण के बाद आत्मनिर्भर रक्षा इको सिस्टम के माध्यम से क्षमता विकास पर केंद्रित है। भारतीय सेना खुद को आधुनिक, आत्मनिर्भर और प्रौद्योगिकी उन्नत बल में बदलने की मेक इन इंडिया पहल में प्रमुख भागीदार है। उत्तरी कमान ऑपरेशन पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए स्वयं इस अभियान में सबसे आगे बनी हुई है।