सार्वजनिक यात्री वाहनों में महिला सुरक्षा को लेकर प्रदेश सरकार गंभीर नहीं है। यात्री वाहनों में जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) पैनिक बटन लगाने की कवायद फिलहाल ठंडे बस्ते में है। वर्तमान में सिर्फ नए पंजीकृत हो रहे यात्री वाहनों में ही यह सिस्टम है, जबकि पुराने वाहनों में सिस्टम को लगाने के लिए सरकार के पास कोई योजना नहीं है।
बता दें की केंद्र सरकार ने 2019 से सभी नवीन वाहनों में जीपीएस के साथ पैनिक बटन को अनिवार्य किया है। 2019 में प्रदेश सरकार ने पुराने वाहनों में पैनिक बटन और जीपीसीए लगाने की पहल शुरू की थी, लेकिन जीपीएस लगाने की कीमत को लेकर ट्रांसपोर्टरों के विरोध के बाद इस पहल को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। 2019 के बाद पंजीकृत हो रहे यात्री वाहनों में जीपीएस सिस्टम और पैनिक बटन कंपनी द्वारा लगाया जाता है। इन वाहनों की निगरानी के लिए फिलहाल अभी प्रदेश में कोई ट्रैकिंग केंद्र नहीं है। ट्रैकिंग केंद्र नहीं होने के कारण भी ट्रांसपोर्टर वाहनों में जीपीएस लगाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
परिवहन आयुक्त के कार्यालय में तैयार हो रहा केंद्र
परिवहन विभाग के अतिरिक्त सचिव राज मोहम्मद मालिक ने कहा कि जीपीएस से उक्त वाहनों को ट्रैक करने के लिए परिवहन आयुक्त कार्यालय जम्मू में ट्रैकिंग सेंटर तैयार हो रहा है। यह सेंटर केंद्र सरकार की मदद से बनाया जा रहा है। इसमें मशीनरी केंद्र सरकार देगी। इसके साथ परिवहन विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इस केंद्र को शुरू करने में एक वर्ष तक का समय लग सकता है। इस केंद्र में यात्री वाहनों का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। सेंटर से हर वाहन पर नजर रखी जाएगी।
जीपीएस सिस्टम और पैनिक बटन से लाभ
जीपीसी सिस्टम लगाने से वाहनों पर निगरानी रखी जाएगी। वाहन की गतिविधि को ट्रैक किया जाएगा। वहीं पैनिक बटन होने से आपात स्थिति में पैनिक बटन दबाने से परिहवन विभाग और पुलिस कंट्रोल रूम में अलर्ट पहुंच जाएगा, जिससे त्वरित एक्शन या मदद पहुंच सकेगी।