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जम्मू-कश्मीर : घने जंगल में प्राकृतिक गुफाएं बन रही हैं ऑपरेशन में अड़चन, खिंच सकता है अभियान

Wed, 20 Oct 2021 02:17 AM IST
शाहरुख खान मुनीश शर्मा, पुंछ

सार

ग्राउंड जीरो पर हैं चुनौतीपूर्ण हालात, भौगोलिक परिस्थितियों से लंबा खिंच रहा ऑपरेशन। 
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पुंछ में आतंकी ठिकानों की तलाश... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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घना जंगल, बरसाती नाले, विशालकाय चट्टानें और छोटी-छोटी गुफाएं। मेंढर तहसील के भाटादूड़ियां इलाके में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में यह भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी अड़चन बनी हुई हैं। संवाददाता ने मुठभेड़ स्थल के ग्राउंड जीरो का जायजा लिया तो ऑपरेशन के लंबा खिंचने की वजहें सामने आ गईं। 

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जंगल में पेड़ और झाड़ियां इतनी घनी हैं कि हाथ को हाथ भी न सूझे। आधा दर्जन नाले हैं, जिसके किनारों पर बड़ी-बड़ी चट्टानें हैं। इन चट्टानों के नीचे छोटी-छोटी गुफाएं बनी हैं, जिसके भीतर एक साथ कई आतंकी छिप सकते हैं। ऐसे में छिपे हुए आतंकियों को न तो देख पाना मुमकिन हो पा रहा है और ना ही गोलाबारी से बड़ा नुकसान पहुंचाना संभव हो पा रहा है। 

यही वजह है कि चारों ओर से घेराबंदी के बावजूद अभी तक एक भी आतंकी के मारे जाने की सूचना नहीं है। सैन्य सूत्रों ने आतंकियों की मौजूदगी का तो पता लगा लिया है लेकिन वे किस चट्टान या गुफा की आड़ लेकर छिपे हैं, इसका अंदाज नहीं लग पा रहा है। चट्टानें भी इतनी बड़ी हैं कि इनके पीछे छिपे आतंकी अपनी लोकेशन बदल भी लें तो वे किसी को दिखाई नहीं देते। भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए सेना का ऑपरेशन पूरी एहतियात के साथ आगे बढ़ रहा है। 
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प्राकृतिक गुफाओं में हो सकते हैं कई ठिकाने
घने जंगल के बीच प्राकृतिक गुफाओं में आतंकियों के कई ठिकाने हो सकते हैं। जमीनी परिस्थितियां देखकर आशंका जताई जा सकती है कि आतंकियों ने अपने ठिपने के ठिकाने पहले से तय कर रखे हैं। दरअसल आतंकी इस घने जंगल में कई महीनों से हैं। इसकी पुष्टि राजोरी-पुंछ रेंज के डीआईजी विवेक गुप्ता भी कर चुके हैं। 

सेना की इतने बड़े पैमाने पर घेराबंदी के बावजूद आतंकियों का पता नहीं चल पाना दर्शा रहा है कि आतंकियों ने पहले से छिपने के इंतजाम कर रखे हैं। सूत्रों के अनुसार घने जंगल का यह इलाका कई किलोमीटर तक फैला है। पहाड़ों की ढलान भी तीखी है, जिससे इसे खंगालना इतना आसान नहीं है। इस इलाके में ग्रामीणों की आवाजाही भी नहीं है। ऐसे में आतंकियों का चमरेड़, पंगेई और भाटादूड़ियां तक आसानी से पहुंच जाना उनके कई ठिकानों की ओर इशारा करता है।

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