अदालत ने कहा, चेक की राशि और जिस तारीख से चेक के तहत राशि देय हो गई है उसका उचित ब्याज के साथ भुगतान इस संबंध में एक अच्छा मार्गदर्शक हो सकता है। अदालत ने कहा,चेक की राशि के बराबर जुर्माना और चेक की तारीख से सजा के फैसले की तारीख तक कम से कम 6 फीसदी प्रतिवर्ष ब्याज लगाने की सलाह दी जाती है। हालांकि इस तरह का जुर्माना लगाने से पहले ट्रायल मजिस्ट्रेट को एनआई की धारा 143 ए के तहत भुगतान की गई अंतरिम मुआवजे की राशि यदि कोई हो तो उससे बचना चाहिए। यह साधारण कारावास की सजा के साथ हो भी सकता है और नहीं भी। यह विशुद्ध रूप से ट्रायल मजिस्ट्रेट के विवेक पर है, लेकिन कानून के उद्देश्य के संबंध में यह उचित होगा कि कारावास की सजा को कम से कम रखा जाए, जब तक कि अभियुक्त का आचरण इसके लिए विवश न करे।