सीआरपीएफ जम्मू-कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव करवाने और अमरनाथ यात्रा के लिए तैयार है। वहां हो रही सुरक्षा तैयारियों से इसके संकेत मिल रहे हैं। यहां तैनात सीआरपीएफ के आईजी एमएस भाटिया ने मंगलवार को त्राल में प्रेसवार्ता में कहा कि हमारा प्रयास होगा कि यहां कोई भी कार्यक्रम हो, चाहे चुनाव हो या फिर यात्रा...हम तैनात रहेंगे।
जब भी कोई कार्यक्रम होता है तो वे यह सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं कि यह शांतिपूर्वक ढंग से हों। सनद रहे कि कुछ दिन पहले आगामी श्रीअमरनाथ यात्रा ट्रैक से बर्फ हटाने, ट्रैक को चौड़ा करने और मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है।
इसकी जिम्मेदारी पहली बार बीआरओ को सौंपी गई है। वहीं, उप राज्यपाल बीआरओ अधिकारियों से बैठक कर निर्देश जारी किए हैं।
परिसीमन के बाद बढ़े 7.72 लाख मतदाता
जम्मू-कश्मीर में परिसीमन के बाद 7.72 लाख वोटर बढ़े हैं। मतदाता पुनरीक्षण के दौरान 11 लाख लोगों ने मतदाता बनने के लिए आवेदन किया था, लेकिन सूची से साढ़े तीन लाख से अधिक नाम हटाए गए।
पिछले साल 26 नवंबर को मतदाता सूची प्रकाशन के साथ ही विधानसभा चुनाव की बाधा भी दूर हो गई थी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इससे चुनाव में अब कोई बाधा नहीं रह गई है।
बस केवल माहौल तथा सुरक्षा स्थिति का आकलन करने के बाद आयोग चुनाव की घोषणा कर सकता है। चुनाव कार्यालय के अनुसार 18-19 आयु वर्ग के 301961 मतदाता हैं। चुनाव के लिए 613 नए मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
इससे प्रदेश में 11370 केंद्र बन गए हैं। लिंगानुपात भी 948 हो गया है जिसमें 27 अंक की वृद्धि हुई है। पहले मतदाताओं की संख्या एक हजार पुरुषों पर 921 थी। दिव्यांग मतदाताओं की संख्या बढ़कर 57253 तक पहुंच गई है।
सभी दल चाहते हैं जल्द चुनाव हो
सभी विपक्षी दलों की ओर से जल्द से जल्द चुनाव कराने की मांग की जा रही है। कुछ दिन पहले दक्षिण कश्मीर में भाजपा के संगठन महामंत्री अशोक कौल दावा कर चुके हैं कि विस चुनाव इसी साल होंगे। हालांकि, हाल में एलजी प्रशासन की ओर से संपत्ति कर लगाए जाने के बाद से भाजपा असहज है। उसका मानना है कि इसका जनता में प्रतिकूल असर पड़ा है।