जम्मू-कश्मीर में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच चिकित्सा प्रबंधन को मजबूत बनाया जा रहा है। जीएमसी जम्मू और जीएमसी श्रीनगर में 1-1 डीएनए सीक्वेंसिंग (जेनेटिक) मशीन लगाई जा रही है। इस मशीन के जरिए कोविड जैसी संक्रमित बीमारियों के वैरिएंट का समय पर पता लगाकर उनका इलाज करने और आने वाली पीढ़ी को रोग मुक्त बनाने में मदद मिलेगी।
जम्मू के कटड़ा क्षेत्र में अब डेल्टा प्लस का एक मामला मिल चुका है। अभी तक कोविड वैरिएंट की जांच के लिए नमूनों को दिल्ली स्थित नेशनल सेंटर फार डिजीज कंट्रोल भेजा जा रहा है, जिनकी एक माह बाद रिपोर्ट आ रही है। इस प्रणाली में राज्यों में कुल संक्रमित मामलों में से अलग-अलग 5 फीसदी आरटी-पीसीआर मामलों के नमूने ले लिए जाते हैं, जिनकी जेनेटिक सीक्वेंसिंग जांची जाती है।
देशभर के विभिन्न हिस्सों में अब तक कोविड के अल्फा, बीटा, डेल्टा, डेल्टा प्लस आदि वैरिएंट मिल चुके हैं। इसमें ताजा वैरिएंट पहले से कई गुणा अधिक खतरनाक बताए जा रहे हैं। ऐसे वैरिएंट संक्रमण को तेजी से फैला रहे हैं। इन वैरिएंट की जांच में देरी होने पर उनकी बीमारियों की रोकथाम में भी देरी हो जाती है, जिससे संक्रमण का अधिक प्रसार हो जाता है। इसके देखते हुए जीएमसी जम्मू और श्रीनगर में कोविड टेस्टिंग को मजबूत बनाया जा रहा है।
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टेस्ट से मिलती है वायरस के बारे में सारी जानकारी
जेनेटिक सीक्वेंसिंग एक तरह से किसी वायरस का बायोडेटा होता है। कोई वायरस कैसा है, किस तरह से दिखता है, इसकी जानकारी उसके जेनेटिक से मिलती है। इसी वायरस के विशाल समूह को जेनेटिक (जीनोम) कहा जाता है। इससे ही करोना के नए स्ट्रेन के बारे में पता चलता है।
जीएमसी के माइक्रोबायोलाजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप डोगरा का कहना है कि डीएनए सीक्वेंसिंग मशीन से मरीजों को लाभ पहुंचेगा। इसमें वैरियंट की जल्द पहचान होकर संबंधित बीमारियों की रोकथाम के लिए उचित उपाय किए जा सकेंगे। अभी तक प्रदेश में सरकारी स्तर पर ऐसी कोई मशीन नहीं है।