आतंकियों से सांठगांठ में जेल विभाग के उप अधीक्षक और एक स्कूल प्रिसिंपल को सरकार ने बर्खास्त कर दिया है। दोनों के खिलाफ कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 311(2) के तहत की गई है। शिक्षक फारूक अब्दुल्ला तथा प्रिंसिपल उमर अब्दुल्ला के कार्यकाल के दौरान नियुक्त किए गए थे। सूत्रों ने बताया कि जेल विभाग के उप अधीक्षक फिरोज अहमद लोन पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के कार्यकाल में 2012 में नियुक्त हुआ था। उसने आतंकी कमांडरों के साथ मिलकर युवाओं को हथियारों की ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान एवं पीओजेके भेजने की साजिश रची। वहां से इन युवाओं को कश्मीर में धकेलकर हिजबुल मुजाहिदीन के सक्रिय आतंकी के रूप में काम करने की साजिश थी।
उप अधीक्षक लोन आतंकी नायूके के लिए करता था काम
पता चला है कि लोन मारा गया हिजबुल आतंकी रियाज नायकू के लिए काम कर रहा था। जांच में पता चला कि दो युवाओं पुलवामा के लिट्टर के दानिश गुलाम लोन व अवंतिपोरा के डोगरीपोरा के सोहैल अहमद भट की भर्ती के बाद रियाज नायकू ने दोनों को जेल में बंद उसके सहयोगी इशाक पल्ला से मिलने को कहा। बताते हैं कि जेल अधिकारियों ने दानिश व सोहैल को मिलने की अनुमति नहीं दी और दोनों को जेल से बाहर कर दिया। जांच में पता चला कि इसके बाद पल्ला ने लोन से मुलाकात की।
दानिश और सोहैल को जारी कर दिया था पास
इसके बाद लोन ने पद का दुरुपयोग करते हुए दानिश व सोहैल को पास जारी कर दिया। इतना ही लोन जेल के रिसेप्शन क्षेत्र में जाकर दोनों युवकों को जेल परिसर के अंदर तक लाया ताकि पल्ला की मुलाकात हो सके। इस मुलाकात में दानिश व सोहैल को सीमापार भेजने की साजिश रची गई ताकि आतंकी संगठन में शामिल होकर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ा जा सके।
जेल व्यवस्था को पूरी तरह तहस-नहस की
हालांकि, दोनों बॉर्डर क्रास होने से पहले ही गिरफ्तार कर लिए गए। यह खुला तथ्य है कि 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर की जेलें कट्टरता की पाठशाला थी। जेल से ही आतंकी साजिश रची जाती थीं। फिरोज लोन जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोग इन साजिशों में सहयोग करते थे और जेल की व्यवस्था को पूरी तरह तहस-नहस करते थे।
प्रिसिंपल 1989 में हुआ था शिक्षा विभाग में नियुक्त
गवर्नमेंट गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल बिजबिहाड़ा का प्रिसिंपल जावेद अहमद शाह 1989 में लेक्चरर के रूप में नियुक्त हुआ था। बाद में प्रिंसिपल बना। वह हार्डकोर आतंकी समर्थक तथा हुर्रियत व जमात-ए-इस्लामी का कट्टर समर्थक है। वह 2016 में आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद भड़की हिंसा में हुर्रियत व जमात के लिए सलाहकार के तौर पर काम कर रहा था। प्रिंसिपल के तौर पर वह न केवल अपने स्कूल बल्कि आसपास के स्कूलों में हुर्रियत के हड़ताल कैलेंडर को लागू कराना सुनिश्चित करता था।
छात्रों को पढ़ने से रोकता था
अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वह छात्राओं को पढ़ने से रोकता था। इतना ही नहीं उन्हें शारीरिक शिक्षा तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होने से भी रोकता था। उन्हें भड़काता था कि यह इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है। वह आतंकियों की मदद करता था। साथ ही छात्राओं को इस्लामी शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करता था ताकि उन्हें कट्टर बनाया जा सके। साथ ही जमात के मंसूबों को सफल बनाया जा सके।
अब तक 40 पर कार्रवाई, कई पर लटकी तलवार
सरकार ने अब तक देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त 40 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। हिजबुल सरगना सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटों, हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के नाती समेत अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कई और पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
सरकार ने देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त सैकड़ों कर्मचारियों के खिलाफ पीएसए के तहत भी कार्रवाई की है। अब इन्हें जम्मू-कश्मीर से बाहर की जेलों में शिफ्ट किया जा रहा है। आगरा सेंट्रल जेल में इस महीने 38 कुख्यात पत्थरबाजों व ओजीडब्ल्यू को भेजा जा चुका है। अभी और कई को शिफ्ट किया जाना है।
चतुर्थ श्रेणी कर्मी बर्खास्त
स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से पांच साल से गैरहाजिर चल रहे एक चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। निदेशालय के अनुसार कर्मचारी जुलाई 2016 से गैरहाजिर चल रहा था। कई बार नोटिस देने के बावजूद कर्मी की ओर से उचित जवाब नहीं दिया गया। कर्मचारी अखनूर में कार्यरत था। नियमों के तहत कर्मचारी को बर्खास्त किया गया है। बताया जाता है कि एक अन्य गैरहाजिर चतुर्थ श्रेणी कर्मी को बर्खास्त करने की प्रक्रिया चल रही है।