जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फ्रंट ने लाखों लोगों के मौलिक अधिकारों के हनन पर केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की है। मानवाधिकार दिवस पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात में फ्रंट के प्रतिनिधियों ने इस बाबत विस्तृत जानकारी दी। फ्रंट ने बयान में कहा है कि एक बड़ी आबादी को 68 साल बाद भी मौलिक अधिकार हासिल नहीं हो सके हैं।
फ्रंट ने कहा कि वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों, पीओके रिफ्यूजियों, कश्मीरी पंडितों और सिख विस्थापितों, 1947 के शरणार्थी, वाल्मीकि समाज, दूसरे राज्यों में विवाह करने वाली महिलाओं, गोरखा आदि समूहों को राज्य सरकार द्वारा अधिकारों से वंचित किया गया है।
इन्हें स्थायी निवास प्रमाण पत्र नहीं मिलता। मतदान का अधिकार, शिक्षा, रोजगार, पुनर्वास, सांस्कृतिक पहचान जैसे अधिकार हासिल नहीं हो पाए हैं। फ्रंट ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को इन मामलों में नोडल एजेंसी की भूमिका निभानी चाहिए।
बयान में पुनर्वास आयुक्त की नियुक्ति, विस्थापितों के लिए राष्ट्रीय रजिस्टर और अन्य सक्षम एजेंसियों की नियुक्ति की मांग की गई है। फ्रंट के संयोजक महेंद्र मेहता ने कहा कि राजनाथ ने कहा कि वह इन मामलों के त्वरित समाधान की दिशा में कदम उठाएंगे। उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों के साथ फ्रंट के प्रतिनिधियों की बैठक कर ठोस कदम उठाने का भी आश्वासन दिया।