जम्मू। जम्मू संभाग के दस जिलों के किडनी (गुर्दा) मरीजों को अब प्रत्यारोपण के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। निकट भविष्य में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जम्मू में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए बुनियादी ढांचे को विकसित कर लिया गया है।
स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय नई दिल्ली के महानिदेशक स्वास्थ्य सेवा (डीजीएचएस) की तीन सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जम्मू और जीएमसी का दौरा कर किडनी प्रत्यारोपण की सुविधाओं का निरीक्षण किया।
टीम सदस्यों में पीजीआई चंडीगढ़, राम मनोहर लोहिया अस्पताल नई दिल्ली के अलावा वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक डॉ. शाजिया वफाई ने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के यूरोलॉजी और नेफरोलॉजी विभाग के साथ जीएमसी के विभिन्न विभागों, लेबोरेटरी, इमरजेंसी आदि सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसमें सरकार के ट्रांसप्लांटेशन आफ ह्यूमन आर्गन्स एंड टिशू एक्ट थोटा 1994 के तहत निर्धारित मानकों को देखा गया।
डीजीएचएस से पंजीकृत होने के बाद सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी) के मरीजों को प्रत्यारोपण सुविधा का लाभ मिल सकेगा। नेफरोलॉजी विभाग में दैनिक आधार पर तीन शिफ्टों में 30 से 40 मरीजों के डायलिसिस किए जा रहे हैं। सभाग में नए किडनी मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सरकारी मेडिकल कॉलेज श्रीनर में पहले ही लोगों को किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा दी जा रही है, लेकिन जम्मू में इसे अब तक शुरू नहीं किया जा सका है।
जीएमसी की प्रिंसिपल डॉ. शशि सूदन ने कहा कि किडनी प्रत्यारोपण के लिए सभी सुविधाएं विकसित की गई हैं और उम्मीद है कि जल्द प्रत्यारोपण सुविधा शुरू कर दी जाएगी। यूरोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. इलियास शर्मा ने कहा कि किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत वाले मरीजों को इस संस्थान या राज्य अंग और ऊतक (टिशू) प्रत्यारोपण संगठन (सोटो) जम्मू के साथ खुद को पंजीकृत करना होगा। इस दौरान प्रशासक अश्विनी खजूरिया आदि मौजूद रहे।