जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर ने पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के दुबारा 1987 के हालातों के लौटने वाले बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर महबूबा मुफ्ती के सामने इस तरह के उदाहरण थे तो उन्हे 2014 में यह बात सोचनी चाहिए थी जब जब वह भाजपा के साथ हाथ मिला रही थी।
उन्होंने कहा कि उस समय महबूबा मुफ्ती को रियासत के बच्चे-बच्चे, देश विदेश से लोगों और सियासी सलाहकारों ने नसीहत दी थी। मीर ने यह भी कहा कि महबूबा मुफ्ती को अपनी कथनी और करनी में फर्क नहीं करना चाहिए। 2014 में जिस बुनियाद पर महबूबा ने लोगों से वोट लूटे और बाद में उन्हे धोका दिया, जो हालात घाटी में बने हुए हैं उसके लिए महबूबा मुफ्ती खुद और उनकी जमात पूरी तरह से जिम्मेदार है।
घाटी के मौजूदा हालातों और आए दिन हत्याओं पर बोलते हुए मीर ने कहा कि जिस तरह से महबूबा मुफ्ती ने लोगों के साथ धोकाधड़ी कर साढ़े तीन साल हकूमत चलाईं और जिन लोगों को उन्होंने उभरने का मौका दिया वो इतनी जल्दी खत्म नहीं होने वाले, इसमें समय लगेगा। मीर का इशारा आतंकियों की ओर था।