कश्मीरी पंडितों को होमलैंड का अधिकार मिलना चाहिए। केंद्र सरकार इस पर जल्द से जल्द कार्रवाई करे। यह बात काले दिवस पर आयोजित जेनोसाइड(नरसंहार) एंड होलकास्ट प्रदर्शनी में पनुन कश्मीर के अध्यक्ष अश्वनी चारुंगू ने कही। उन्होंने कहा कि 13 जुलाई 1931 कश्मीर से हिंदु समुदाय को खदड़ने का काम शुरू हो गया था।
अंग्रेजों ने हिंदुओं को कश्मीर से भागने को रणनीति बनाई। इस दौरान समुदाय को तोड़ने पर काम हुआ। विचरनाग, महाराज गंज, हरि सिंह हाई स्ट्रीट, बोहरी, कदल और कनीकोट में लूटपाट हुई और हिंदुओं को प्रताड़ित किया गया। इस दौरान कई हिंदुओं की जानें भी गईं।
इस काले दिवस को शहीद दिवस के रूप में भी बनाया जाता है। इस दिन हिंदुओं को मारा गया था। उन्होंने जेएंडके कोर्ट बार एसोसिएशन जम्मू के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि काले दिवस को वोर्किंग डे के रूप में मनाया गया है। 1931 से लेकर अभी तक हिंदुओं को खदड़ने का काम चल रहा है। 1990 में कश्मीरी पंडितों पर हमला किया गया। इसमें हजारों लोगों को मौत के घाट उतारा गया।
इस मौके पर वीरेंद्र रैना ने सरकार को कश्मीरी पंडितों को कश्मीर में बसाने को लेकर कार्रवाई तेज करनी चाहिए। लंबे समय से कश्मीरी पंडित मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रोहंगियां-बांग्लादेशियों को जल्द से जल्द राज्य से बाहर किया जाए। आतंकी वारदातों में इनका हाथ रहा है। नशे के कारोबार में भी संलिप्त है। इस मौके पर पनुन कश्मीर से अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।