कश्मीर में वरिष्ठ पत्रकार की हत्या के मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आई है। घटना के करीब 12 घंटे के बाद फोरेंसी टीम सबूत हासिल करने पहुंची थी। वहीं घटना के वक्त मौजूद कई लोगों का अारोप कि अगर पुलिस समय पर पहुंचती उनमें से किसी की जान बचाई जा सकती थी।
श्रीनगर के भीड़भाड़ वाले लाल चौक से सटे प्रैस एंक्लेव में गुरुवार की शाम राईसिंग कश्मीर अखबार के संपादक शुजात बुखारी और उनके दो पीएसओ पर हुए हमले में पुलिस की लापरवाही देखने को मिल रही है। सूत्रों से मिली एक वीडियो के अनुसार पुलिस की फोरेंसिक टीम घटना स्थल पर सबूतों को इक्कठा करने और क्राइम सीन का वीडियो अथवा फोटोग्राफी करने के लिए घटने के करीब 12 घंटे से अधिक समय होने के बाद पहुंचती है।
इस वीडियो में एक पुलिसकर्मी फोरेंसिक टीम के एक सदस्य को गोलियों के निशान की ओर इशारा करते दिख रहा है जबकि बाद में वो शख्स गोलियों के निशान को मार्क कर उनकी फोटोग्राफी करता दिखाई दे रहा है। सवाल यह पैदा होता है कि क्या घटना के 12 घंटे से अधिक बीतने के बाद भी वहां सबूत मौजूद रहें होंगे ?
अमूमन घटना के होने के तुरंत बाद सबसे पहले क्राइम सीन की निशानदेही कर उसे संरक्षित रखा जाता है ताकि सबूत न नष्ट हो और तुरंत मौके से सबूत इकट्ठा करने के साथ-साथ क्राइम सीन की फोटो अथवा वीडियोग्राफी की जाती है।
अगर क्राइम सीन को संरक्षित न किया गया हो तो लोगों की दखल अंदाजी से सबूत नष्ट हो सकते हैं। गौरतलब है कि इस हमले में शुजात बुखारी समेत उनके दोनों पीएसओ एसजीसीटी अब्दुल हमीद और कांस्टेबल मुमताज अहमद की मौत हो गई।
एक चश्मदीद के अनुसार घटना स्थल से थाना केवल करीब 500 मिटर की दूरी पर होने के बावजूद भी पुलिस करीब 20 से 25 मिनट देर से मौके पर पहुंची। चश्मदीद ने बताया कि जब वह मौके पर पहुंचे तो एक पीएसओ सांस ले रहा था, अगर उसे समय रहते अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद वो बच सकता था।
एक और शख्स ने 100 नंबर पर फोन भी किया लेकिन उससे घटना की पुष्टि करने करने की बात कही गई। पुलिस की इस लापरवाही के चलते लोगों में कहीं न कहीं गुस्सा जरूर है।