नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे राजोरी व पुंछ जिले में सीआरपीएफ की अतिरिक्त 20 कंपनियों की तैनाती का निर्णय लिया गया है। दो हजार से ज्यादा जवानों को अल्पसंख्यकों की आबादी वाले संवेदनशील इलाकों में भेजा जाना है।
केंद्र सरकार के निर्देश के बाद सीआरपीएफ की पहली कंपनी ने वीरवार को ढांगरी गांव में मोर्चा संभाल लिया। सूत्रों के अनुसार 15 कंपनियां राजोरी व पुंछ में तैनाती के लिए पहुंच गई हैं और पांच कंपनियां अगले कुछ दिनों में पहुंचेंगी। गांव में पहुंच कर कंपनी ने मोर्चा संभालकर डॉग स्क्वायड के साथ तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
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नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे राजोरी व पुंछ जिले में सीआरपीएफ की अतिरिक्त 20 कंपनियों की तैनाती का निर्णय लिया गया है। दो हजार से ज्यादा जवानों को अल्पसंख्यकों की आबादी वाले संवेदनशील इलाकों में भेजा जाना है।
भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा से सटे राजोरी और पुंछ जिले आतंकवाद के शुरुआती दौर में खासे प्रभावित रहे हैं। सरपंच धीरज शर्मा ने बताया कि उन्होंने सुरक्षा की मांग की थी, जिसे एलजी ने सात दिन में पूरा किया है। राजोरी में 1990 के दशक में भी इस तरह की घटनाएं होती थीं।
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धीरे-धीरे राजोरी और पुंछ में आतंकवाद कम होता गया और सुरक्षाबलों की तैनाती कमी कर दी गई। यहां तक कि विलेज डिफेंस कमेटियों के लोगों से हथियार भी ले लिए गए। इन कमेटियों को दोबारा बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अतिरिक्त कंपनियों को तैनात किए जाने पर टीआरएफ ने दी धमकी
राजोरी में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त कंपनियों को तैनात किए जाने पर आतंकी संगठन टीआरएफ ने धमकी दी है। सोशल मीडिया पर वायरल इस धमकी में कहा गया है कि इसके गंभीर परिणाम होंगे। यह दर्शाता है कि जमीनी हालात क्या हैं। इससे आने वाले दिनों में और अधिक क्रूरता की आशंका है।