जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर दौरे पर आए केेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लोगों को कई उम्मीद हैं। अवाम को लगता है कि हालात बेहतर हो जाएंगे, लेकिन पाकिस्तान से बातचीत करने तक हालात ठीक होंगे यह संभव नहीं लगता। शनिवार को राजोरी-कालाकोट के दौरे पर पहुंचे डॉ. फारूक ने कहा कि शांति बहाली के दावे हों या उद्योग लगाने के वादे। यह सब तभी सच साबित होंगे जब जमीनी हकीकत में शांति होगी।
उन्होंने कहा कि दावा किया जाता है कि बॉर्डर पर हालात ठीक हैं। यदि ऐसा है तो आतंकी कहां से आ रहे हैं। कश्मीर में आतंकवाद खात्मे के दावे किए जाते हैं, लेकिन पाकिस्तान से आकर आतंकी नागरिकों की हत्या कर देते हैं। केंद्र को स्थायी समाधान के लिए सोचना होगा, जो सिर्फ बातचीत से ही मुमकिन है। डॉ. फारूक ने कहा कि उद्योग लगाने की बातें हो रही हैं। हालिया हत्याओं के बाद से कामगार घाटी छोड़ रहे हैं। उद्योगों में कौन काम करेगा।
सीमा पार 200-300 आतंकी हैं तो उन्हें मारते क्यों नहीं
डॉ. फारूक ने कहा कि आए दिन सीमा पार 200 या 300 आतंकी होने का दावा किया जाता है। सरकार को यह संख्या पता कैसे चलती है। यदि यह सूचना सही है तो फिर इन्हें उस पार जाकर मारा क्यों नहीं जाता।
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परिसीमन में हिंदू-मुस्लिम पैमाना न बनाएं
उन्होंने कहा कि परिसीमन को लेकर हिंदू और मुस्लिम आबादी के पैमाने पर बात हो रही है। केंद्र इस पूरी प्रक्रिया में धर्म को आधार न बनाए। उन्होंने कहा कि पीएम ने दिल्ली में बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर से दिल्ली की दूरी मिटाने की बात कही थी। इसके लिए अभी तक कुछ नहीं किया गया है। निर्दोष लोगों पर पीएसए लगाया गया है, जिन्हें फौरन रिहा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो कश्मीरी पंडित मुलाजिम घाटी छोड़कर आए हैं, हालात ठीक होने तक उन्हें जम्मू में ही वेतन दिया जाए।