शिक्षाविदों ने कहा, विश्व सामाजिक दिवस की सार्थकता के लिए भेदभाव मिटाना होगा
विश्व सामाजिक न्याय दिवस आज
मंगेश कुमार
जम्मू। न्याय की परिभाषा को जिंदा रखने के लिए 20 फरवरी को विश्व सामाजिक दिवस मनाया जाता है। यह पहल तीन साल पहले शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य समाज के हर व्यक्ति और वर्ग को समान अधिकार प्रदान करना है। शिक्षित तबके की जिम्मेदारी है कि वे शिक्षा से दूर वर्ग को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करें। इससे विश्व सामाजिक न्याय दिवस की सार्थकता समझ में आएगी। व्यवस्था में भी सुधार होगा। यह कहना है विधि विभाग के शिक्षाविदों का। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ग को जागरूक करना होगा। लिंग भेद, दहेज प्रथा, महिला हिंसा, नशाखोरी, भ्रूण हत्या आदि कुरीतियों को जड़ से खत्म करना होगा। समानता की दृष्टि से आगे बढ़ना होगा। तभी विश्व सामाजिक न्याय दिवस की परिकल्पना संभव है।
जरूरतमंद परिवारों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति का हो प्रावधान
जम्मू विश्वविद्यालय विधि विभाग के शिक्षाविद डॉ. संजय गुप्ता ने कहा कि सरकारी स्कूलों में छात्रों को निशुल्क वर्दी, पुस्तकों के साथ छात्रवृत्ति का भी प्रावधान था, लेकिन अब छात्रवृत्ति मेधावियों को ही दी जाती है। पढ़ाई की इच्छा जाहिर करने वाले बच्चे लाभों से वंचित हैं। डॉ. गुप्ता ने कहा कि जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को भी पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति दी जानी चाहिए। जम्मू विश्वविद्यालय के शिक्षाविद डॉ. राज संधु ने कहा कि स्कूल सिर्फ पढ़ाई ही नहीं विद्यार्थी को रोजगार में भी सक्षम बनाते हैं। लेकिन मौजूदा समय में छात्रों को रोजगार के साथ जोड़ नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था शुरू की गई है। इसमें प्रावधान रखना चाहिए कि जरूरतमंद परिवारों के जो बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ना चाहते हैं, उन्हें सरकार मदद मुहैया करवाए।