स्कूल शिक्षा विभाग स्कूली बच्चों के शिक्षा स्तर में सुधार और शिक्षकों की जवाबदेही को तय करने के लिए संरक्षक-शिक्षक (मेंटर-टीचर) पहल को शुरू कर रहा है। इसके तहत दस छात्रों की शिक्षा में सुधार की जिम्मेवारी एक शिक्षक पर होगी। विभाग दिसंबर अंत तक इस पहले को शुरू करेगा। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग सभी शिक्षकों के प्रदर्शन और छात्रों के मुल्यांकन की मासिक रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जाएगा।
इसके तहत शिक्षक स्कूल के कमजोर छात्रों के लिए मेंटर की भूमिका निभाएंगे। मुख्य सचिव अरुण कुमार मेहता ने विभाग को इस पहले को शुरू करने का निर्देश दिए है। मंगलवार को मुख्य सचिव अरुण कुमार मेहता ने स्कूल शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा की। इस दौरान कहा कि विभाग नई शिक्षा नीति के तहत प्रदेश के 8 हजार स्कूलों में चरणबद्ध रूप से किंडरगार्टन शुरू करेगा।
मुख्य सचिव ने विभाग को विंटर जोन में आने वाले स्कूलों में अगले दो महीने और समर जोन के स्कूलों में 31 मार्च किंटरगार्डन को शुरू करने को कहा। बैठक में बातया कि इस शैक्षणिक वर्ष के दौरान प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में 22,07,296 छात्रों का नामांकन दर्ज हुए हैं, जिसमें से 80 फीसदी स्कूल सरकारी क्षेत्र में है। प्रदेश में प्राथमिक स्तर, उच्च प्राथमिक स्तर, उच्च विद्यालय और उच्च माध्यमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात क्रमश: 111.65 फीसदी, 80.53 फीसदी, 72.52 फीसदी और 60.53 फीसदी है।
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शिक्षा के क्षेत्र में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों में 15 बालिका छात्रावासों का निर्माण किया है। मुख्य सचिव ने तलाश योजना में पंचायतों में शामिल करने को ताकि स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा नामंकन करवाया जा सके। उन्होंने स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति की निगारानी के लिए बायो- मेट्रिक शुरू करने को कहा।