देश भर में चल रहे कोयला संकट के कारण अब आने वाले 15 दिनों के बाद लोगों को एक से दो घंटे के कट सहने पड़ सकते हैं। उत्पादन के लिहाज से जम्मू-कश्मीर बिजली सरप्लस प्रदेश है, लेकिन ज्यादातर परियोजनाएं एनएचपीसी की हैं, जहां से बिजली दूसरे राज्यों में सप्लाई होती है। प्रदेश की घरेलू खपत के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार केंद्र से बिजली खरीदती है और इसमें से कुछ बिजली कोयले से चलने वाले थर्मल प्रोजेक्टों से सप्लाई होती है।
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विद्युत विकास निगम के प्रबंध निदेशक गुरमीत सिंह ने कहा कि कोयला संकट आने पर कुछ कटौती करनी पड़ी थी, लेकिन केंद्र से पत्राचार करने के बाद बिजली आपूर्ति सामान्य हो गई है। वर्तमान में कोई समस्या नहीं है। हालांकि आने वाले दो सप्ताह में जैसे ही बिजली उत्पादन के आंकड़े गिरेंगे तो प्रदेश में बिजली कटौती करनी पड़ सकती है। इसके लिए केंद्र के समक्ष मामले को उठाया गया है। प्रयास किया जा रहा है कि जरूरत के अनुसार बिजली की आपूर्ति होती रहे।