पिता का शव लेकर पैतृक गांव जा रहे एक केएएस अफसर सहित चार लोगों की दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। पीडब्ल्यूडी विभाग के एडिशनल सेक्रेटरी कल्याण सिंह की कार करीब 300 फुट गहरी खाई में जा गिरी।
इस दर्दनाक हादसे में कल्याण सिंह के अलावा उनकी पत्नी, सास और साले की मौत हो गई। डोडा के डीसी ने इस हादसे के बाद सभी विभागों में आधे दिन की छुट्टी घोषित कर दी।
मिली जानकारी के अनुसार केएएस अफसर के पिता प्रभुदयाल काफी समय से जीएमसी जम्मू में भर्ती थे। शुक्रवार तड़के साढ़े तीन बजे उनका निधन हो गया। पिता के पार्थिव शरीर को लेकर कल्याण सिंह और उनकी पत्नी अनीता, मां प्रेमा देवी, सास सोमा देवी व साला डा. विंकल ठाकुर पैतृक गांव जोधपुर के लिए रवाना हुए।
तीन सौ फुट गहरी खाई में गिरी कार
बटोत के पास पहुंचने पर मां की जिद पर कल्याण सिंह, पत्नी, सास और साला विंकल स्विफ्ट कार (जेके06-5076) में बैठ गए। सुबह करीब 11 बजे कार खिलैनी पेट्रोल पंप के पास अचानक अनियंत्रित होकर सीधे खाई में जा गिरी।
एंबुलेंस में पिता का शव, मां और अन्य रिश्तेदार थे। स्थानीय लोगों की मदद से खाई से सभी को निकाल कर जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने कल्याण सिंह और उनकी पत्नी (पेशे से शिक्षिका) अनीता को मृत घोषित कर दिया।
सास सोमा देवी ने भी इलाज के दौरान कुछ ही देर में दम तोड़ दिया। साले विंकल को एयर लिफ्ट कर जीएमसी जम्मू शिफ्ट किया गया। शुक्रवार की शाम उसने भी दम तोड़ दिया।
देर शाम कल्याण सिंह, उनके पिता और पत्नी का शव गांव जोधपुर लाया गया। शवों के पहुंचते ही हजारों लोग उनके घर पर उमड़ पड़े। जबकि सास और साले के शव को डोडा से उनके अपने गांव टेंसना भेज दिया गया।
काश! बेटे को कार में नहीं भेजा होता
काश! कल्याण सिंह की मां ने उन्हें पत्नी सहित एंबुलेंस से कार में नहीं भेजा होता। लेकिन मां प्रेमा देवी करती भी क्या...। पिता के पार्थिव शरीर पर कल्याण सिंह का एंबुलेंस के अंदर रो-रोकर बुरा हाल हो रहा था। उनकी हालत देखकर मां का दिल पसीज रहा था।
सामने पति का शव। उस पर बदहवास सा बेटा। कोई मां यह कैसे झेल सकती थी। इसी मामता वश उन्होंने बेटे को बहु के साथ सास और साले की कार में भेज दिया। किसको पता था कि कार में काल जबड़ा फाड़े बैठा हुआ है।
किसी महिला के लिए इससे बड़ा बदनसीबी और क्या हो सकता है कि सामने पति, बेटे और बहु का एक साथ शव पड़ा हो। 42 वर्षीय कल्याण सिंह की वृद्ध मां प्रेमा देवी को बस एक ही पश्चाताप खाए जा रहा है कि उसने बेटे को क्यों एंबुलेंस से निकाल दिया।
पिता के शव के पास रोने छोड़ क्यों नहीं दिया। यदि ऐसी भूल नहीं की होती तो इतना बुरा दिन नहीं देखना पड़ता है। बुजुर्ग का क्या एक दिन तो जाना ही होता है। लेकिन भगवान दुश्मन के जवान बेटे-बहू को न छीने।
सीने को पीट-पीट कर दहाड़ मारती कल्याण की मां और रोते-चिल्लाते उनके बेटे मयंक की हालत देखकर वहां मौजूद हजारों लोगों के हौसले पस्त हो रहे थे।