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अगला नववर्ष कश्मीर में मनाने का संकल्प लेंगे विस्थापित कश्मीरी पंडित

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जम्मू। मां शारदा और ऋषि कश्यप को स्मरण करते हुए मैं यह संकल्प लेता हूं कि अपने पूर्वजों की भूमि कश्मीर में शांति, सद्भाव और समरसता की स्थापना के लिए समर्पित रहूंगा। मैं इस पवित्र भूमि की गौरवशाली परंपरा के संरक्षण के लिए तन, मन और धन से योगदान दूंगा। मैं इस बात के लिए प्रयासरत रहूंगा कि अगला नवरेह (नववर्ष) कश्मीर में अपने परिजनों और मित्रों के साथ आनंदपूर्वक मनाऊंगा।
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13 अप्रैल मंगलवार को नवरेह के पावन पर्व पर जम्मू के अलावा देश व विश्व भर में बसे हुए विस्थापित कश्मीरी पंडित अपने घरों में परिजनों के साथ यह संकल्प पत्र पढ़ेंगे और कश्मीर में अपने घरों में लौटने की शपथ लेंगे। तीन दशक से ज्यादा समय से आतंकवाद व अलगाववाद से पीड़ित होकर अपने देश में ही विस्थापित का दंश झेल रहे कश्मीरी पंडित नवरेह के अवसर पर पहली बार अगला नववर्ष कश्मीर में मनाने की शपथ लेंगे। कश्मीरी हिंदू समाज की संस्था संजीवनी शारदा केंद्र आनंद नगर बोहड़ी की तरफ से नवरेह संकल्प दिवस का आह्वान किया गया है।
केंद्र के प्रमुख सदस्य संदीप पंडिता ने बताया कि 13 अप्रैल को कश्मीरी हिंदू समाज नवरेह (नववर्ष) के तौर पर मनाता है। इस दिन पवित्र नवरात्र की भी शुरुआत हो रही है। ऐसे में कश्मीरी हिंदू इस पवित्र दिवस को नवरेह संकल्प दिवस के रूप में मनाएंगे। कश्मीरी हिंदू समाज से अनुरोध किया गया है कि सुबह नवरेह थाल का दर्शन करते हुए अपनी परंपरागत वेशभूषा में संकल्प लें।
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शौर्य दिवस पर संघ प्रमुख का वर्चुअल संबोधन सुनेंगे
बुधवार 14 अप्रैल को विस्थापित कश्मीरी पंडित शौर्य दिवस के रूप में मनाएंगे। इस दिन शाम सात बजे आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का वर्चुअल माध्यम से संबोधन भी होगा। इसके लिए संजीवनी शारदा केंद्र की तरफ से सामूहिक कार्यक्रम का आयोजन भी बोहड़ी केंद्र में किया जाएगा।
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