संत सम्मेलन के दौरान प्रवचन देते स्वामी प्रकाशानंद जी
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आरएस पुरा। कस्बे की वार्ड-10 के दुर्गा मंदिर में महंत मदन लाल की अध्यक्षता में 11 वें संत सम्मेलन में पहुंचे संतों ने भक्तजनों को प्रवचन सुना मंत्रमुग्ध किया। सोमवार को सम्मेलन के चौथे दिन हरिद्वार से पहुंचे महामंडलेश्रवर आनंद, स्वामी प्रकाशनंद आदि ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला का वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
संत सम्मेलन में संतों ने कहा कि कृष्ण के पैदा होने के बाद कंस उन्हें मौत के घाट उतारने के लिए राक्षस पूतना को भेजता है। पूतना कृष्ण को जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, लेकिन भगवान कृष्ण उसको मौत देते हैं। उसके बाद कार्तिक माह में ब्रजवासी इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन की तैयारी करते हैं। भगवान कृष्ण गोवर्धन की पूजन करने की बात कहते हैं। इंद्र क्रोध में भारी वर्षा करते हैं। इसको देखकर समस्त ब्रजवासी परेशान हो उठते हैं। भारी वर्षा देख भगवान कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर पूरे नगरवासियों को पर्वत के नीचे बुला लेते हैं। इसके बाद ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज के जयकारे लगने लगते हैं। भक्तों के सम्मुख कृष्ण जन्म से लेकर उनकी समस्त बाल लीलाओं का वर्णन किया। इस दौरान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने भगवान कृष्ण गोवर्धन पूजन का भी वर्णन करते हुए बताया कि मनुष्य का अपने क्रोध पर काबू पाना उसका सबसे अहम गुण है। ईश्वर का उसी घर वास होता है, जहां स्त्री का सम्मान होता है।