पंजाब सिंह की पत्नी तस्वीर दिखाते हुए।
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आरएस पुरा। गांव कोटली भगवान सिंह निवासी स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय पंजाब सिंह की पत्नी व परिजनों ने बताया कि आजादी में योगदान देने पर उन्हें पंजाब सिंह पर गर्व है। 105 वर्ष की आयु में सात माह पूर्व वह इस दुनिया से वह चल बसे। पंजाब सिंह की 92 वर्षीय पत्नी नीरजू देवी ने बताया कि शादी के एक माह बाद पंजाब सिंह आजाद हिंद फौज में भर्ती होने के बाद लगभग दस वर्ष बाद घर आए थे।
मन में ख्याल आता था कि पता नहीं वह कहां हैं। घर आएंगे या नहीं, लेेकिन एक दिन वह घर पहुंचे। उन्होंने बताया कि वे जापान में कैद थे। जेल में कैदियों के साथ बुरा बर्ताव किया जाता था। उनके बेटे जर्मन सिंह व कर्ण सिंह बाद में सेना में भर्ती हो गए। उन्होंने बताया कि आजाद हिंद फौज के कमांडर सुभाष चंद्र बोस जापान में कैद होने पर मिलने आऐ थे। उन्होंने कहा था कि वह उनके आगे के जीवन के लिए संघर्ष जारी रखेंगे ताकि वह देश में जा सकें। जिस समय वह घर लौटे तो उनकी आयु लगभग 40 वर्ष के करीब थी। उन्हें तो पेंशन मिलती थी, लेकिन उनके चले जाने के बाद उनकी मां नीरजू देवी की पेंशन नहीं लग पाई, जिसके लिए उन्होंने आवेदन किया था। दिल्ली से दो बार पत्र आया कि उनकी माता का नाम पार्ट आर्डर में दर्ज नहीं होने पर दिक्कत आ रही है, जिसका शीघ्र समाधान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पिता ने देश की आजादी के लिए योगदान दिया, जिसका गर्व है। उनके पोते को सेना में भर्ती नहीं किया गया, जिसका उन्हें दुख है। इस दौरान गांव के मदन सिंह, सुखदेव सिंह जमवाल आदि ने बताया कि पंजाब सिंह उनके बुजुर्ग थे और देश के प्रति उनकी भावना होने पर वह चाहते थे कि सुभाष चंद्र बोस देश की कमान संभालते पर ऐसा नहीं हो पाया।
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नेताजी की बातें करके बढ़ाते थे उत्साह
आरएस पुरा। स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय वरियाम सिंह की पत्नी अंतरो देवी ने बताया कि उन्हें इस दुनिया से गए दस वर्ष हो गए हैं। उनके पति वरियाम सिंह जमवाल स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले महान क्रांतिकारी नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू की बातों को याद कर हमारा उत्साह बढ़ाते थे। आज भी ऐसा लगता है कि नेताजी हमारे आसपास हैं।
सुभाष चंद्र बोस जब अपनी कड़क आवाज में तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा, कह कर हम सभी को बताते थे, तो रोंगटे खड़े हो जाते थे। उस समय नेताजी के जोश और पराक्रम के बारे में अहसास होता था। उनके बेटे कौशल सिंह ने बताया कि उनके पिता को ताम्रपत्र देश की सरकार की ओर से भेंट करने के साथ जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से भी सम्मानित किया गया। दादा राम सिंह जमवाल महाराजा की सेना में थे। अपनी बहादुरी दिखाने पर महाराजा की ओर उन्हें भी सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने पूर्वजों पर गर्व है, जिन्होंने देश की आजादी में अपना अहम योगदान दिया। संवाद