जम्मू। तीसरी लहर में जम्मू-कश्मीर में कोरोना मरीजों की हो रही मौतों में आधे से ज्यादा मौतें ओमिक्रॉन वेरिएंट से हुई हैं। संभाग के सबसे बड़े राजकीय अस्पताल जीएमसी जम्मू के माइक्रोबायोलॉजी विज्ञान ((सूक्ष्म जीव विज्ञान) विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर संदीप डोगरा के अनुसार जम्मू-कश्मीर में जीनोम सिक्वेंसिंग प्रयोगशाला नहीं होने की वजह से मरीजों के अलावा कोरोना से मर रहे मरीजो के सैंपल जांच के लिए नई दिल्ली स्थित प्रयोगशाला में भेजे जा रहे हैं। वहां से जांच रिपोर्ट मिलने में एक महीने से भी ज्यादा का समय लग रहा है, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्रालय व जीनोम सिक्वेंसिंग प्रयोगशाला से मिली अब तक की रिपोर्ट के अनुसार तीसरी लहर में प्रदेश में ज्यादातर मौतें अब ओमिक्रॉन वेरिएंट से ही हो रही हैं।
हालांकि डॉक्टरो के अनुसार ओमिक्रॉन वेरिएंट से ज्यादातर जो मौतें हो रही हैं, उनमें ज्यादातार बुजुर्ग हैं या वह लोग हैं, जिन्हें पहले से कोई बीमारी थी। डेल्टा प्लस वेरिएंट मौतों के मामले में ज्यादा खतरनाक रहा है। हालांकि ओमिक्रॉन वेरिएंट काफी तेजी से फैला, यहीं चिंता का कारण है। उल्लेखनीय है कि कोरोना की तीसरी नहर प्रदेश में दिसंबर के आखिरी सप्ताह में आई थी। 21 दिसंबर तक प्रदेश में कोरोना की पहली दो लहर में 4514 लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि 29 जनवरी 2022 तक 138 लोग तीसरी लहर में अपनी जान गंवा चुके हैं।