जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला मानते हैं कि कश्मीर में भड़की हिंसा की आग अगर अभी बुझ भी जाती है तो भावना का कोई झोंका चिंगारी को फिर शोलों में बदल सकता है। कश्मीर के मसले को महज कानून व्यवस्था और सुरक्षा के लिहाज से देखना उचित नहीं है।
यह सियासी मसला है और बातचीत से ही इसका हल ढूंढा जा सकता है। बंदूकें कभी किसी मसले का समाधान नहीं हो सकती है। बंदूकें चाहे जिसकी हों, सिर्फ खून बहाना ही उनकी फितरत होती है। आज खून बहाने का वक्त नहीं, बल्कि जख्मों पर मरहम लगाने और मसले के स्थायी हल के लिए अर्थपूर्ण पहल की जरूरत है।
अमर उजाला से बातचीत में फारूक ने कहा कि सिंधु जल समझौते को तोड़ने की धमकी फिजूल है। उन्होंने कहा कि आज आम कश्मीरी आहत हुआ है। उसकी बात सुनी नहीं जा रही है। सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल आया और चला गया। नतीजा कुछ नहीं निकला। प्रयास फेल हो गया।
खुदा के वास्ते तख्त से उतरकर सभी पक्षों से बात करें मोदी
फारूक अब्दुल्ला
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उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान के गृह मंत्री कई दौरे कर गए, लेकिन विश्वास का माहौल बनाया नहीं जा सका। हम बहुत नुकसान झेल चुके हैं। अब और कितना झेलना होगा। हम बहुत नुकसान झेल चुके हैं। अब और कितना झेलना होगा। कब तक यह सब चलता रहेगा। दिल्ली की हुकूमत को कश्मीर तब याद आता है, जब हिंसा बढ़ जाती है।
ऐसा नहीं चलेगा। खुदा के वास्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तख्त से नीचे उतरकर कश्मीर के सभी पक्षों से दिल खोलकर बातचीत करें। यही एक समाधान है।
सेना की पलटनों की संख्या बढ़ाकर और बंकरों को फिर से बहाल कर मसला हल नहीं होगा। पाकिस्तान से भी बात करनी होगी।
नदियों का पानी रोका तो जम्मू-कश्मीर और पंजाब में आएगी बाढ़
फारूक अब्दुल्ला
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फारूक ने कहा कि सिंधु जल संधि को तोड़ने की बात की जा रही है। भारत ऐसा कर ही नहीं सकता है। आप किसी का पानी रोक नहीं सकते। उन्होंने सवाल किया कि संधि तोड़ी तो झेलम और सिंधु का पानी कहां ले जाएंगे।
रावी, व्यास, सतलुज, चिनाब और झेलम का पानी रोका तो जम्मू और श्रीनगर में बाढ़ आएगी। पंजाब और हिमाचल भी प्रभावित होगा। सिंधु पानी विवाद पहले ही अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में जा चुका है। बगलिहार, किशनगंगा और उससे पहले सलाल हाइड्रो प्रोजेक्ट पर पाकिस्तान आपत्ति जताता रहा है।
फिजूल है पाकिस्तान से जंग की बात
फारूक अब्दुल्ला
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फारूक का मानना है कि पाकिस्तान से कोई लड़ाई नहीं होगी। दोनों देश महज जोर दिखा रहे हैं। भारत कहेगा कि हम नहीं छोड़ेंगे और पाक कहेगा कि हम भी तैयार हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि हम दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन अपने पड़ोसी नहीं बदल सकते। अब तय करना होगा कि पड़ोसी पाकिस्तान से या तो दोस्ती निभानी होगी या दुश्मनी। दुशमनी और जंग से पाकिस्तान ज्यादा बर्बाद होगा, लेकिन हम भी कम तबाह नहीं होंगे।