कश्मीर घाटी में बिगड़े हालात से सेब की मिठास कहीं फीकी न पड़ जाए, क्योंकि फसल तैयार होने के बावजूद सप्लाई प्रभावित हो रही है। हालात में सुधार नहीं हुआ तो अर्थव्यवस्था को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। इसके चलते सेब बागवान चिंतित हैं।
पिछले दो महीने से कर्फ्यू, अलगाववादियों के बंद और बिगड़े हालात से जहां घाटी में हर चीज पर बुरा प्रभाव पड़ा है, वहीं अब यह असर सेब उद्योग पर भी भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। कश्मीर घाटी में इस समय सेब की विभिन किस्में लगभग तैयार हो चुकी हैं और अब इनकी पैकेजिंग का काम चल रहा है, लेकिन बिगड़े हालात के चलते बागवानों को अपना माल राज्य से बाहर भेजने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
ट्रक चालकों पर हमले के कारण नहीं जा रहा है माल
घाटी में तैनात जवान
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सेब उत्पादक अता मोहम्मद के अनुसार सेब पर हमारा सब कुछ निर्भर है और अब हमारा सेब बाहर भेजने के लिए तैयार है, लेकिन काफी दिक्कत आ रही है। एक व्यापारी तारिक अहमद के अनुसार उन्हें अपने माल को राज्य के बाहर की मंडियों में भेजने में काफी मुश्किल हो रही है, क्योंकि एक तो यहां की मंडियां बंद हैं और साथ ही बाहर भेजने के साधन भी बहुत कम हैं।
व्यापारियों के अनुसार ऐसे हालात में ट्रक चालक भी माल बाहर ले जाने को तैयार नहीं, क्योंकि उन्हे हालात का डर सता रहा है। ट्रक चालक सतबीर सिंह के अनुसार आमतौर पर वह इस सीजन में अच्छी कमाई करते थे, लेकिन इस बार बिगड़े हालात से उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सतबीर के अनुसार इन हालात में वे डरते हैं कि कहीं उन्हें प्रदर्शनकारियों का सामना न करना पड़े, क्योंकि अक्सर इस दौरान ट्रक चालक निशाना बनते आए हैं।
हर साल 6000 करोड़ का है व्यापार
सेब की खेती वाले किसानों को नुकसान
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व्यापारियों का यह भी कहना है कि अगर उनका माल बाहर नहीं जा सका तो उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। स्थानीय मार्केट में उन्हें वे रेट नहीं मिल पाए जो मिलने चाहिएं। कुछ व्यापारी तो सरकार से यह गुहार लगाते दिख रहे हैं कि वह कोई समाधान निकाले, जिससे हालात में जल्द सुधार आए और वह अपना व्यापार सही से कर सकें।
गौरतलब है कि कश्मीर का सेब उद्योग एक मुख्य उद्योग है, जिस पर कश्मीर की अर्थव्यवस्था निर्भर करती है, क्योंकि हर वर्ष सालाना घाटी में केवल सेब का 6000 करोड़ का व्यापार होता है। ऐसे में हालात के चलते यह व्यापार प्रभावित होता है तो सीधे तौर पर राज्य की विशेष तौर पर कश्मीर की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।