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दिल्ली दरबार की मध्यस्थता से जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और भाजपा के सुर मिले

Wed, 01 Feb 2017 10:54 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
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सीएम महबूबा मुफ्ती के साथ डिप्टी सीएम - फोटो : FILE PHOTO
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अनुच्छेद 370 पर पीडीपी और भाजपा के बीच तनी तरकार की डोर ढीली पड़ गई है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाने की बात करने वालों को राष्ट्र विरोधी के समकक्ष खड़ा कर दिए जाने के बाद दोनों दलों में मतभेद की खाई फिर से चौड़ी होती दिखी।
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भाजपा विधायकों को लगा कि उनके लिए अपने क्षेत्रों में वोटरों के सवालों का उत्तर देना मुश्किल हो जाएगा। लिहाजा, भाजपा के कुछ विधायकों ने सदन में विरोध जताने का फैसला कर लिया। सदन में नेकां और कांग्रेस विधायकों के हंगामे के बाद भाजपा और पीडीपी की खींचतान भी बढ़ी, लेकिन, देर शाम सुलगती आग को बुझाने में सफलता मिल गई। पीडीपी और भाजपा दोनों दल अब इस मुद्दे को ज्यादा तूल देने के मूड में नहीं हैं। 

भाजपा सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू की भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और महासचिव राम माधव से बातचीत हुई। महबूबा ने स्पष्ट किया कि उनका मतलब एजेंडा आफ एलायंस के प्रति प्रतिबद्धता तक सीमित था।
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उन्होंने भाषण के उस अंश को भी बताया जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और वित्त मंत्री अरुण जेटली की एजेंडे पर प्रतिबद्धता का जिक्र किया था। इस बातचीत के बाद मुख्यमंत्री महबूबा और उप मुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह के बीच फोन पर बातचीत हुई।
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अनुच्छेद 370 पर मुख्यमंत्री के बयान पर हंगामा

विधानसभा में हंगामा - फोटो : FILE PHOTO
सूत्रों के मुताबिक दोनों का इस मुद्दे पर एक सुर हैं। सुलह के तय फार्मूले के तहत मुख्यमंत्री बुधवार को बयान पर स्थिति स्पष्ट कर सकती हैं। इसके बाद भाजपा को नरम पड़ने का आधार मिल जाएगा। दिल्ली के निर्देश पर भाजपा के विधायकों और मंत्रियों की एक बैठक हुई जिसमें बुधवार को सदन में नेकां और कांग्रेस के स्टैंड के विरोध का निर्णय लिया गया।

दरअसल, 370 को हटाने की बात श्याम प्रसाद मुखर्जी, दीन दयाल उपाध्याय से लेकर अटल-आडवाणी और नरेंद्र मोदी तक करते रहे। सीएम द्वारा 370 के विरोध को राष्ट्र विरोध बताने के बाद भाजपा के लिए खासी मुश्किलें पैदा हो गईं।

भाजपा विधायकों को दिल्ली ने यह भी कहा कि भाषण के वक्त ही वाकआउट करना चाहिए था। अब देर हो गई है और अब विरोध नेकां और कांग्रेस को फायदा पहुंचाएगा। पीडीपी के मंत्रियों और विधायकों की बैठक में भी ऐसा ही फैसला हुआ है। पीडीपी और भाजपा अपनी पार्टी के एजेंडे पर स्टैंड लेते रहेंगे और सरकार चलाने के लिए एजेंडा आफ एलायंस की दुहाई देंगे। 
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