हरी पर्वत किले के एक ओर मुसलमानों की मकदूम साहिब की जियारत है, दूसरी ओर हिन्दुओं का शारिका देवी मंदिर और पर्वत के दामन में गुरुद्वारा छट्टी पादशाही भी है। इसके बारे में कहा जाता है कि सिखों के छठे गुरु हरगोबिन्द सिंह यहां आए थे। इस बीच पुराण यह भी कहते हैं कि कश्मीर एक झील थी और इस पहाड़ी पर एक राक्षस रहता था जो लोगों को तंग करता था। श्रीनगर की ईष्ट देवी मां शारिका ने एक चिड़िया का रूप धारण कर उस राक्षस के सर पर कंकर फेंका जो एक विशाल पत्थर के रूप में शारिका देवी मंदिर में आज भी मौजूद है। इसी से राक्षस का नाश हुआ था।