भारत के पूर्व कप्तान और जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम के मुख्य कोच रहे बिशन सिंह बेदी का सोमवार को निधन हो गया। 2011 से पहले एक साल तक बिना कोच के खेल रही जम्मू-कश्मीर टीम को बिशन सिंह बेदी के रूप में नया कोच मिला था। जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) के साथ तीन साल का करार किया, लेकिन डेढ़ साल बाद उन्होंने पद छोड़ दिया। टीम के साथ मुख्य कोच रूप में उनके सफर को जम्मू-कश्मीर सबसे बेहतर समय माना जाता है। उनके मार्गदर्शन टीम ने जीतना सिखा, परवेज रसूल जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जम्मू से निकले।
17 जुलाई 2011 को बिशन सिंह बेदी ने जेकेसीए के साथ मुख्य कोच के रूप में तीन साल का करार किया। डेढ़ के कार्यकाल में बेदी ने पद छोड़ा दिया। उनका विवादों के साथ नाता रहा। जेकेसीए और खिलाड़ियों से भी उनके मतभेद रहा। 2012 में हास्टल मैदान साइंस कॉलेज में आंध्र प्रदेश के खिलाफ रणजी मुकाबले के लिए टीम चयन में भेदभाव के आरोप लगे। इसके चलते कश्मीर संभाग के सभी खिलाड़ियों ने मैच का बहिष्कार किया। कोच बिशन सिंह बेदी ने इस मुकाबले जम्मू संभाग के खिलाड़ियों को उतारा। मामला काफी बढ़ा तो खिलाड़ियों ने उस समय में जेकेसीए के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला को शिकायत की। इसके बाद बिशन सिंह बेदी ने त्यागपत्र दिया, जिसके जेकेसीए ने मंजूर किया।
जेकेसीए में उस समय रणजी टीम के प्रबंधक रहे राजेश धर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर टीम को पंख देने का काम बिशन सिंह बेदी ने किया। खिलाड़ियों में नए जोश भरा और उनमें जीत की ललक पैदा की। टीम को अपने मार्गदर्शन में लड़ना सिखाया।
परवेज रसूल को अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाया
बिशन सिंह बेदी ने अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में टीम में नए जोश भरा था। खिलाड़ियों की सोच में सकारात्मक बदलाव किया और टीम को जीत की पटरी पर लाया। उनके की मार्गदर्शन में परवेज रसूल, इयान देव सिंह सहित अन्य खिलाड़ी उनके मार्गदर्शन में अपना करियर शुरू किया और आगे जाकर प्रदेश का नाम रोशन किया। परवेज रसूल को अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाने में बिशन सिंह बेदी का अहम योगदान रहा है।