जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन एक्ट (सांकेतिक तस्वीर)
बदले जम्मू-कश्मीर की ओर औद्योगिक घरानों ने भी रुख करना शुरू कर दिया है। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन एक्ट लागू होने के दो साल के भीतर ही प्रदेश में 12 हजार करोड़ के औद्योगिक निवेश के प्रस्ताव मिल गए हैं। आतंकवाद प्रभावित दक्षिण कश्मीर में जिंदल जैसा बड़ा औद्योगिक घराना स्टील प्लांट लगाने के लिए आगे आया है। पुलवामा के लस्सीपोरा में जेएसडब्ल्यू (जिंदल साउथ वेस्ट) समूह 150 करोड़ रुपये से 1.2 लाख मीट्रिक टन कलर कोटेड स्टील मैन्युफैक्चिरिंग क्षमता वाला इस्पात संयंत्र स्थापित करेगा। जिंदल स्टील कंपनी यहां स्टील पैनल और दरवाजे बनाएगी। इसके अलावा प्रदेश में औद्योगिक निवेश और उद्योगों के लिए आधारभूत ढांचे के विकास के लिए दुबई से भी करार किया गया है।
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के दो साल के भीतर सरकार ने जम्मू-कश्मीर में उद्योगों के लिए रास्ता तैयार कर दिया है। औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए लाई गई 28,500 करोड़ की औद्योगिक विकास नीति से देश विदेश के निवेशकों का अच्छा रुझान है। सरकार ने प्रदेश में 2022 तक 51 हजार करोड़ औद्योगिक निवेश का लक्ष्य रखा है। इससे पांच लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। दो साल में मिले 12000 करोड़ के प्रस्तावों में 5000 हजार करोड़ जम्मू संभाग और 7000 करोड़ कश्मीर में निवेश होगा। जम्मू-कश्मीर में उद्योग लगाने के लिए निवेशकों के रुझान को देखते हुए सरकार ने जमीन उपलब्ध करवाने के लिए कानून में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने विभिन्न जिलों में नई औद्योगिक संपदाओं के निर्माण की घोषणा की है, लेकिन इन्हें विकसित करने में समय लग सकता है। इसके लिए जम्मू-कश्मीर के भूमि राजस्व अधिनियम 1962 में संशोधन की तैयारी है। इससे निवेशकों को गैर कृषि बंजर भूमि को हस्तांतरण में सरलता आएगी और वे प्रदेश में जल्दी अपने उद्योग लगा सकेंगे। प्रदेश सरकार ने जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास के लिए 25 हजार कनाल सरकारी भूमि को उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को हस्तांतरित किया है। इसमें 17 हजार कनाल भूमि जम्मू संभाग और 8 हजार कनाल भूमि कश्मीर संभाग में है। विभाग ने जम्मू संभाग में 1548 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लिए सांबा और कठुआ में करीब एक हजार कनाल भूमि को आवंटित किया है। कश्मीर में भी 144.66 करोड़ रुपये की दो परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है। लेकिन विभाग को हस्तांतरित की गई भूमि में एक बड़ा हिस्सा विकसित नहीं हो पाया है।
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गैर कृषि बंजर भूमि से मिल सकती है उद्योगों को रफ्तार
किसानों या अन्य लोगों के पास गैर कृषि बंजर भूमि औद्योगिक विकास में नई गति ला सकती है। इसके लिए भूमि राजस्व अधिनियम में संशोधन जरूरी है। इसमें संशोधन के बाद बाहरी निवेशकों के लिए जम्मू-कश्मीर में बंजर भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया सरल हो जाएगी और वे जल्दी अपने उद्योग स्थापित कर सकेंगे। किसानों को बंजर भूमि के उचित दाम मिलने के साथ स्थानीय क्षेत्र पर रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। बंजर भूमि का औद्योगिक विकास के लिए इस्तेमाल हो सकेगा। जिला सांबा से कठुआ और प्रदेश के अन्य जिलों में बड़े पैमाने पर बंजर भूमि पर कोई गतिविधि नहीं हो रही है। हालांकि भूमि राजस्व अधिनियम में जरूरत के मुताबिक समय-समय पर संशोधन होते रहे हैं। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग जम्मू की निदेशक अनु मल्होत्रा का कहना है कि संबंधित विभाग की ओर से अभी भूमि राजस्व अधिनियम में संशोधन की प्रक्रिया नहीं की गई है।
बंजर भूमि क्षेत्र में रोजगार के साधन बढ़ेंगे : ललित
फेडरेशन आफ इंडस्ट्रीज जम्मू के चेयरमैन ललित महाजन ने कहा कि भूमि राजस्व अधिनियम में संशोधन से बाहरी निवेशकों का जम्मू-कश्मीर में रुझान बढ़ेगा और वे जल्दी बंजर भूमि पर अपने उद्योग स्थापित कर सकेंगे। हाल ही में संबंधित केंद्रीय मंत्री के समक्ष इस मुद्दे को रखा गया है, जिसमें नवंबर में संशोधन किए जाने का आश्वासन दिया गया है। उम्मीद है कि आगामी समय में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।