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अमरनाथ यात्रा शुरू क्रिटिकल केयर एंबुलेंस सपना

Mon, 08 Jun 2015 12:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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रियासत के दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में लगातार बढ़ते सड़क हादसों, आतंकी वारदातों और अन्य दूसरी घटनाओं में गंभीर घायलों को तत्काल चिकित्सा देने के लिए 22 जिलों में चलाई जाने वाली क्रिटिकल केयर एंबुलेंस अभी सपना ही बनी हुई हैं।
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राज्य के अधिकांश अस्पतालों में आधुनिक एंबुलेंस के अभाव में शिफ्टिंग के दौरान गंभीर मरीजों की जान राम भरोसे ही रहती है। अमरनाथ यात्रियों के लिए क्रिटिकल केयर मील का पत्थर साबित हो सकती हैं। यात्रा मार्ग पर कई एक्सीडेंट प्रोन जोन हैं।

यहां हर साल बड़े हादसे होते रहे हैं। लेकिन क्रिटिकल केयर एंबुलेंस न होने से यात्रियों के साथ क्षेत्रवासियों को उपयुक्त चिकित्सा नहीं मिल पाती है। स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डा. बलजीत सिंह पठानिया के अनुसार क्रिटिकल केयर एंबुलेंस पर काम हो रहा है।
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आगामी दो जुलाई से अमरनाथ यात्रा शुरू हो रही है। इससे यकायक जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रोजाना हजारों वाहनों का लोड बढ़ेगा। देश विदेश से लाखों यात्री बाबा बर्फानी के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। लेकिन जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर कई स्थानों पर एक्सीडेंट प्रोन जोन से हादसे होते रहे हैं।

इसमें उधमपुर, बटोत, रामबन, बनिहाल जैसे कई स्थान हैं। इस बार यात्रा के लिए मुगल रोड से भी बड़ी संख्या में यात्रियों के जाने की उम्मीद है। लेकिन इस मार्ग की हालत काफी खस्ता होने से अब तक कई हादसे हो चुके हैं।

ऐसे एक्सीडेंट प्रोन जोन में क्रिटिकल केयर एंबुलेंस घायलों के लिए काफी मददगार साबित होती हैं। इस प्रोजेक्ट में राज्य के सभी 22 जिलों के अलावा स्वास्थ्य निदेशालय जम्मू और श्रीनगर में एक-एक अतिरिक्त एंबुलेंस रखने का प्रस्ताव है।

वैष्णो देवी के यात्रियों के लिए विशेष तौर पर कटड़ा में एक एंबुलेंस लगाई जानी है। इस प्रोजेक्ट के लिए एनआरएचएम के तहत पांच करोड़ रुपये की राशि मंजूर हुई थी। लेकिन चार साल बाद भी एंबुलेंस पर कुछ खास नहीं हो पाया है।

ईटेंडरिंग पर भी एंबुलेंस की खरीद फरोख्त पर कुछ नहीं हो पाया। अब जेएंडके मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन द्वारा क्रिटिकल केयर एंबुलेंस खरीदने पर काम हो सकता है। क्रिटिकल केयर एंबुलेंस में पर्याप्त स्टाफ के साथ जीवन रक्षक उपकरण और दवाइयां उपलब्ध रहती हैं।

जिससे गंभीर मरीजों की सांसे बचाने में मदद मिलती है। शहरी अस्पतालों की बात करें तो जीएमसी, सुपर स्पेशलिटी और गांधीनगर अस्पताल में एक-एक एंबुलेंस हैं। लेकिन इन्हें अधिकांश वीआईपी मामलों में ही दौड़ाया जाता है। शहरी अस्पतालों में गंभीर मरीजों को दूसरे राज्यों में शिफ्ट करने के दौरान तीमारदारों को मजबूरन महंगे खर्चे पर निजी क्रिटिकल केयर एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है।
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