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मात्र 709 कर्मचारियों के हवाले है शहर की सफाई

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दो अक्तूबर को स्वच्छता अभियान शुरू करने के ऐलान के बाद सरकारी और गैर सरकारी विभाग भी अभियान चलाने के लिए कमर कस चुके हैं।
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मुख्य रूप से हालांकि नगर निगम ने वीरवार को शहर के पांच अलग-अलग केंद्र से सफाई शुरू करने की योजना बनाई है, लेकिन देखना यह है कि यह योजना सफाई कर्मियों के कम स्टाफ में भी कितनी कारगर रहती है। वर्तमान में नगर निगम के पास मात्र 709 सफाई कर्मचारी हैं।

इसके अलावा एनजीओ के सफाई कर्मियों की मदद ली जा रही है। इस तरह से देखा जाए तो मंदिरों के शहर में 5000 सफाई कर्मियों की जरूरत है। ऐसा नहीं होने के कारण सड़कों पर गंदगी बिखरी नजर आती है। निगम की हद 112 स्क्वेयर किलोमीटर तक फैली है, जिसमें 71 वार्ड हैं और शहर की आबादी पंद्रह लाख से अधिक है।
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शहर की सफाई के ल‌िए एनजीओ भी आए साथ

कुंजवानी से अशोक नगर, सिटी से पाटा बोहड़ी, सिटी से पंजतीर्थी, सिटी से सिद्दड़ा और सिटी से बनतालाब तक नगर निगम की सीमा है। पक्के 922 कर्मचारी हैं, इनमें से मात्र 709 ही फील्ड में काम करते हैं, जिस कारण शहर की गंदगी साफ करना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। नगर निगम एनजीओ के 1099 कर्मचारियों की मदद ले रहा है, जिन्हें शहर की गंदगी साफ करने की एवज में नाममात्र की वेतन मिलता है।

जिसमें से ठेकेदार अपनी कमीशन काट लेता है। ऐसे हालात में सड़क और बाजारों में कचरा बिखरना लाजमी है। ऐसी परिस्थितियों में स्वच्छता अभियान के सामने कई चुनौती है। निगम ने वीरवार से सफाई अभियान शुरू करने को कमर कस ली है लेकि न स्टाफ कम होने के कारण अभियान भी चुनौती बना हुआ है।
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जान‌िए, शहर की सफाई मीटर

कुल वार्ड71
एनजीओ10
स्थायी कर्मचारी709
कंसालिडेटड01
पीडीएल सफाई कर्मी05
कैजुअल कर्मी वार्ड में207
एनजीओ कर्मचारी1099
सहायक सुपरवाइजर78
इंचार्ज सुपरवाइजर48
वर्किंग इन हेल्थ सेंटर40
माशकी एवं निगरान141
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