सैलाब के बाद शहर सहमा-सहमा सा दिखता है। तमाम होटल, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट बंद पड़े हैं। न पर्यटकों की भीड़ है और न खरीदारी की चहल-पहल। अलगाववादियों द्वारा हर शुक्रवार को होने वाले बंद के आयोजनों और आतंकवादियों की हरकतों के कारण इस शहर को कर्फ्यू जैसी स्थिति झेलने की आदत सी हो गई है।
लेकिन इस बार सैलाब की तबाही ने ये हालात पैदा किए हैं। सैलाब के बाद चारों तरफ एक अजीब सी दुर्गंध फिजां में बस गई है जो महामारी के खतरे का आभास कराती है। लिहाजा, रियासत सरकार भी अभी तीन महीने तक पर्यटन व्यवसाय को शुरू करने के पक्ष में नहीं है। होटलों को सफाई के पूरे इंतजाम के बाद ही पर्यटकों को ठहराने की हिदायत दी गई है।
पानी की सप्लाई ठप है। बिजली आपूर्ति शुरू तो हुई है लेकिन कटौती अधिक हो रही है। होटल कर्मचारी भी खुद के लिए उबला हुआ पानी इस्तेमाल कर रहे हैं। केबल कनेक्शन नहीं है। ऐसे में किसी पर्यटक को ठहराया नहीं जा सकता। अधिकांश होटलों में सफाई का काम भी शुरू नहीं हुआ है। इनमें ताला ही लटका है।