फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Udhampur News: महिलाओं की प्रेरणास्रोत बनीं तहसील बसतंगढ़ की पहली ई-रिक्शा चालक बबली देवी

विज्ञापन
ई रिक्शा में यात्रियों को मंजिल तक पहुंचातीं बबली देवी।
विज्ञापन
संवाद न्यूज़ एजेंसी
विज्ञापन

रामनगर। तहसील बसंतगढ़ पहाड़ी इलाके में एक महिला बबली देवी एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के तहत महिला ई-रिक्शा चालक प्रेरणा स्त्रोत बन रही हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के सशक्तीकरण और आर्थिक स्वतंत्रता का एक उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
यह पहल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि ग्रामीण परिवहन और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रही है। बसंतगढ़ के गोथला गांव की बबली देवी बसंतगढ़ तहसील की पहली ई-रिक्शा चालक हैं । वह जब ई-रिक्शा लेकर निकलती हैं तो लोग उसके जज्बे को सलाम करते हैं, परिवार का हाथ बढ़ाने के लिए ई-रिक्शा चलाने वाली बबली पहाड़ी क्षेत्र के महिलाओं के लिए आदर्श बन गई हैं। उसे देखकर बसंतगढ़ की अन्य महिलाओं का हौसला भी बढ़ा है और उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं जो अपने पैरों पर खड़ा होकर कुछ करना चाहती है।
विज्ञापन

बबली देवी ने बताया पहले कि पहले मैं एनआरएलएम उम्मीद सेल्फ हेल्प ग्रुप में कलस्टर कोऑर्डिनेटर का कार्य करती थी । इस कार्य में सेल्फ हेल्प ग्रुप की सभी महिलाओं को व्यापार करने में जागरूक करती थी । ई रिक्शा चलाने का ख्याल उस समय आया जब मैं गांव के दूर दराज इलाकों में महिलाओं को सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाओं की बैठक के दौरान हिस्सा लेने पहुंचती थी और वापस घर आते समय हमें गाड़ियां तक नहीं मिलती थी। तब कई कठिनाइयों का सामना करके हम घर पहुंचते थे।
इस कठिनाई के चलते ई रिक्शा चलाने का विचार आया और उम्मीद के तहत 40,000 का लोन लिया और दीपावली 2024 को खुद का ई-रिक्शा खरीदा। शुरुआत में ई-रिक्शा चलाने के लिए एक चालक रखा, बाद में सोचा क्यों ना मैं ही खुद ई-रिक्शा चलकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाऊं और परिवार का पालन पोषण भी कर सकूं।
तीन महीने तक मैंने चालक से ई-रिक्शा चलाना सीखा और पिछले पांच माह से ई रिक्शा खुद चला रही हूं। मेरे पति गोथला में ही किराने की छोटी दुकान करते हैं, परिवार में मेरे दो बच्चे और ससुर है उन्होंने मेरे कार्य की सराहना की।
पहली बार जब मैं चालक बनकर यात्रियों को लेकर मार्ग पर निकली तो कई लोगों ने मेरा मजाक उड़ाना शुरू किया। लेकिन मेरा हौंसला कम होने की बजाय और भी ज्यादा बढ़ गया। अब धीरे-धीरे सभी लोग मेरे जज्बे को सलाम करते हैं। कई महिलाएं मेरे कार्य की सराहना करती हैं। जब से ई रिक्शा चला रही हूं तब से मैंने अपने दोनों बच्चों को जम्मू के प्राइवेट स्कूल में दाखिल करवाया है।
चालक बबली देवी ने महिलाओं से आग्रह किया जो महिला अपनी मर्जी से कोई कार्य करना चाहती है सेल्फ हेल्प ग्रुप के साथ जुड़िए और कोई कार्य शुरू करिए। उन्होंने कहा सरकार की ओर से महिलाओं के लिए कई स्कीमें चलाई जा रही हैं कि महिलाएं अपना कार्य करें और रोजगार को बढ़ावा दे।
विज्ञापन

ई रिक्शा चालक बबली देवी ने बताया कि मैंने फरवरी 2025 में ई रिक्शा चलाना शुरु किया तब से लेकर आज तक बसंतगढ़ के शिवगली, खनेड,लोधरा में यात्रियों को मंजिल तक पहुंचाती हुँ। इसके अलावा मैं तीन बार ई रिक्शा लेकर उधमपुर में भी गई हुं। इस दौरान ई-रिक्शा में बैठने वाले सभी यात्रियों ने मेरी सराहाना की है और एनआरएलएम उम्मीद सेल्फ हेल्प ग्रुप में कलस्टर कोऑर्डिनेटर के कार्य के साथ पार्टटाइम ई रिक्शा चलकर परिवार का साथ देती हुँ। प्रतिमाह 15 हजार रूपये से अधिक आमदन हो रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें