उधमपुर/जिब। लगभग एक साल से नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को सरकार ने आखिरकार राहत प्रदान करते हुए इन्हें वापस ले लिया है। इससे किसान वर्ग काफी खुश है और इसे लंबे संघर्ष के बाद अपनी जीत मान रहा है।
लेकिन, कृषि बिलों को वापस लिए जाने के मामले पर जिले के किसानों में कोई खास खुशी नहीं है। जिब क्षेत्र के किसानों का कहना है कि जिले में अनाज मंडी न होने के कारण हर बार उनको अपनी फसल बिचौलियों को ही बेचनी पड़ती हैं। यही लोग एमएसपी भी तय करते हैं। इस लिहाज से पिछले साल सरकार की ओर से लाए कृषि कानून उनके लिए सही थे।
क्योंकि वह अपनी मर्जी से किसी भी मंडी में जाकर अपनी फसल को बेच सकते थे। लेकिन, पंजाब और हरियाणा सहित देश के अन्य राज्यों के किसान इन बिलों का लगातार विरोध कर रहे थे। अब सरकार ने इन्हें वापस लेकर अच्छा ही किया है। लेकिन, उधमपुर जैसे छोटे किसानों को इनके लागू होने या वापस होने पर कोई फर्क नहीं पड़ा है।
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जिला में अनाज मंडी न होने के कारण किसान वर्ग परेशान है। सरकार के लाए कृषि कानूनों के लागू होने या वापस लिए जाने से यहां के किसानों के हालात पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। सरकार से अपील है कि जिला में किसानों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए यहां अनाज मंडी स्थापित की जाए, ताकि उन्हें उनकी फसल का उचित दाम मिल सके।
- राहुल शर्मा, किसान, जिब
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कृषि कानून बड़ी समस्या नहीं थे। जिले में अनाज मंडी न होना बड़ी समस्या है। मंडी न होने से मजबूरी में हमें अपनी फसल जम्मू, पंजाब, आदि इलाकों से आए बिचौलियों को औने-पौने दाम में बेचनी पड़ती है। यही लोग अपनी मर्जी से फसल का दाम तय करते हैं। इससे सरकार की तरफ से तय की गई एमएसपी के मुताबिक दाम नहीं मिल पाता।
- ओम प्रकाश, किसान, जिब
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हर क्षेत्र के किसानों की अपनी अलग मजबूरियां हैं। वापस लिए गए कृषि कानून जहां पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के किसानों के लिए अहितकारी थे। वहां इनका जमकर विरोध भी हुआ है। लेकिन, प्रदेश के किसानों ने कभी इनका विरोध नहीं किया। अब जब इन्हें वापस ले लिया गया है, तो कोई खुशी भी नहीं है। लेकिन, फिर भी सरकार ने इन्हें वापस लेकर उन किसानों को राहत दी है, जो करीब एक साल से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
- सुखी राम, किसान, जिब
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जिले के किसानों के लिए न तो अनाज मंडी की कोई व्यवस्था है, और न ही सरकार की ओर से तय की जाने वाली एमएसपी का कोई लाभ मिल पाता है। यहां फसल बेचने की सारी व्यवस्था बिचौलियों पर निर्भर है। इसलिए, इन कृषि कानूनों को लागू करने या वापस लिए जाने से हमारा कोई लेना देना नहीं है। लेकिन, देश के अन्य राज्यों के किसानों के लिए यह अच्छा फैसला जरूर है।
- अशोक कुमार, किसान, जिब
अशोक कुमार- फोटो : UDHAMPUR
सुखी राम- फोटो : UDHAMPUR
ओम प्रकाश- फोटो : UDHAMPUR