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Encounter in Kashmir: सोपोर और पुलवामा में मुठभेड़, सब इंस्पेक्टर के हत्यारे समेत चार आतंकी ढेर

Tue, 21 Jun 2022 07:49 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, सोपोर

सार

उतरी कश्मीर के सोपोर में सुरक्षाबलों ने दो और दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में भी दो आतंकियों को मार गिराने में सुरक्षाबलों को सफलता मिली है।
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encounter - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कश्मीर में मंगलवार को सुरक्षाबलों ने दो अलग-अलग मुठभेड़ में चार आतंकियों को मार गिराया है। इनमें से एक आतंकी सब इंस्पेक्टर फारूक मीर की हत्या में शामिल था। मंगलवार को उतरी कश्मीर के सोपोर में सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को ढेर किया। वहीं, दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में भी दो आतंकियों को मार गिराने में सुरक्षाबलों को सफलता मिली है।

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आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने बताया कि पुलवामा मुठभेड़ में दो आतंकी मार गए हैं। इनमें से एक की पहचान माजिद नजीर के तौर पर हुई है। आतंकी माजिद जैश-ए-मोहम्मद के साथ जुड़ा था और सब इंस्पेक्टर फारूक मीर की हत्या में शामिल था। आईजी ने कहा कि इस साल अब तक 118 आतंकी मारे जा चुके हैं। इसमें से 32 आतंकी पाकिस्तानी हैं। 118 आतंकियों में से 77 लश्कर-ए-तैयबा और 26 जैश-ए-मोहम्मद के हैं। पिछले साल इस अवधि तक 55 आतंकी मारे गए थे, जिसमें दो पाकिस्तानी थे। 

एसएसपी पुलवामा ने बताया कि सुरक्षाबलों ने तुज्जन इलाके के कई घरों में तलाशी ली थी। इसी दौरान छिपे हुए दो आतंकियों ने फायरिंग करनी शुरू कर दी। दोनों आतंकी मारे गए हैं। जिसमें से एक की पहचान पुलवामा निवासी आबिद और दूसरे की पहचान माजिद के रूप में हुई है। माजिद पंपोर का रहना वाला था। यह पुलिस सब इंस्पेक्टर फारूक मीर की हत्या में शामिल था।
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18 जून, शनिवार को जम्मू कश्मीर पुलिस के सब इंस्पेक्टर फारूक मीर का गोलियों से छलनी शव उनके घर के पास धान के खेत में मिला था। वह शुक्रवार देर शाम खेत में काम करने गए थे। इस दौरान आतंकियों ने उन पर हमला किया था। वह 23 बटालियन में तैनात थे।

आतंकियों के पारिस्थितिकी तंत्र पर चोट

घाटी में आतंकियों के खिलाफ ही अभियान नहीं चल रहा, बल्कि आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए उनके पारिस्थितिकी तंत्र पर चोट की जा रही है ताकि बंदूक उठाने के लिए युवाओं को कोई बरगला न सके। इसी रणनीति के तहत जमात से जुड़े स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया गया है। आरोप है कि इन स्कूलों से हिंसा का दुष्चक्र रचा जाता रहा है। वर्ष 2008, 2010 व 2016 की हिंसा में इन स्कूलों की भूमिका को एसआईए की जांच में संदेह के घेरे में रखा गया है।

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