शेखपोरा/बडगाम। मध्य कश्मीर के बडगाम जिले की शेखपोरा माइग्रेंट कॉलोनी में सोमवार को ऑल माइनॉरिटी इम्प्लाइज एसोसिएशन कश्मीर (एएमईएके) के बैनर तले पीएम पैकेज कर्मचारियों ने फिर से अपनी मांग को दोहराया। उन्होंने कहा कि हमारी केवल एक ही मांग है और वो है सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरण। उन्होंने कहा कि अगर मांग पूरी नहीं होगी तो वह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन, वाचडॉग्स आदि से संपर्क करेंगे और शरण मांगेंगे। इसके अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं है।
एएमईएके के संजय कौल ने कहा, सोमवार को सभी जिलों से पीएम पैकेज के कर्मचारी यहां एकत्रित हुए हैं, क्योंकि आज विश्व रिफ्यूजी दिवस है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों के वनवास को 32 साल हो गए, लेकिन समाप्त नहीं हो रहा। सरकार ने हमसे एक बार बात तो की है लेकिन वो किसी नतीजे तक नहीं पहुंची है। हमारी एक ही मांग है कि पीएम पैकेज के छह हजार कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए। हालात ठीक होने तक हमें राहत आयुक्त से अटैच किया जाए। उन्होंने कहा कि हालात की अगर बात करें तो सरकार हर तरीके से कश्मीरी पंडितों को सुविधा प्रदान करने में विफल रही है। 12 साल से जो 6000 लोग यहां नौकरी कर रहे हैं, उनके रहने का ठीक प्रबंध नहीं कि या गया। संजय ने कहा कि आज आनन-फानन में ट्रांसफर, प्रमोशन आदि के आर्डर जारी किये जा रहे हैं, यह हमारी पिछले 12 सालों की मांग रही है। मगर आज हमें इन मांगों से कोई वास्ता नहीं है। हमारी एक ही मांग है, सुरक्षित जगहों पर स्थानांतरण। उन्होंने कहा कि पिछले 38 दिनों से कश्मीर की अलग-अलग जगहों पर हम प्रदर्शन कर रहे हैं और जम्मू में हमारे साथी राहत आयुक्त के दफ्तर में पिछले 6 दिनों से धरने पर हैं। सरकार ने आश्वासन दिया था कि वार्ता का सिलसिला जारी रहेगा लेकिन सरकार ने हमारे लिए दरवाजे बंद कर रखे हैं। उन्होंने कहा कि एक वार्ता से कोई मसला हल नहीं होता।